कम्हेड़ा ग्राम पंचायत में अनियमितताओं का आरोप,

 

ककरौली क्षेत्र के ग्राम कम्हेड़ा में ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव द्वारा ग्राम विकास कार्यों में अनियमितता और धन गबन के गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के आदेश पर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

शिकायतकर्ता के अनुसार दिनांक 16 सितंबर 2025 को डीपीआरओ रेणु श्रीवास्तव एवं सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी धर्मेन्द्र कुमार द्वारा ग्राम पंचायत का निरीक्षण किया गया था, जिसमें कार्य योजना में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। कूड़ेदानों (डस्टबीन) की आपूर्ति में गड़बड़ी पाई गई, जबकि डस्टबीन के नाम पर लगभग 3 लाख 68 हजार रुपये की धनराशि आहरित कर ली गई।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2025-26 की कार्य योजना में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर कोई भुगतान प्रदर्शित नहीं है, जबकि लगभग 17 लाख 43 हजार रुपये की धनराशि पुरानी आईडी से निकाली गई। इस प्रकरण में ग्राम सचिव फैसल अली को निलंबित किया जा चुका है, लेकिन ग्राम प्रधान के विरुद्ध अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने पति/परिजन के नाम पर जीएसटी नंबर 09HZXPS8262M1ZT ले रखा है और ग्राम पंचायत में होने वाले विकास कार्यों—ईंट, सीमेंट, सरिया, प्लास्टिक पाइप व अन्य सामग्री—के फर्जी बिल बनवाकर पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि ग्राम प्रधान या उनके पति के पास आय का कोई वैध स्रोत नहीं है, इसके बावजूद ग्राम विकास निधि के गबन से लगभग 40 लाख रुपये का बैनामा तथा करीब 80 लाख रुपये की लागत से आलीशान मकान (कोठी) का निर्माण कराया गया है। आरोप है कि बीते छह महीनों में लगभग 21 लाख रुपये तथा पिछले साढ़े चार वर्षों में ग्राम विकास के नाम पर बड़ी धनराशि का गबन किया गया।

शिकायतकर्ता ने कूड़ेदान, इंटरलॉक सड़क, तालाब सौंदर्यीकरण, स्ट्रीट लाइट, वाटर आरओ, सोलर लाइट, पुराने लोहे के चैनल, बस स्टैंड सहित अनेक विकास कार्यों में धांधली का आरोप लगाया है। बस स्टैंड के नाम पर 3 लाख रुपये निकालने और तालाब सफाई व सौंदर्यीकरण में करीब 40 लाख रुपये खर्च दिखाकर लगभग 20 लाख रुपये के गबन की भी शिकायत की गई है।

जिलाधिकारी के आदेश पर जांच करने पहुंचे जांच अधिकारी आशीष द्विवेदी एवं अवर अभियंता कृष्ण कुमार ने बताया कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि मामले में लेखपाल और ग्राम प्रधान को अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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