साप्ताहिक बंदी का फेल सिस्टम बाजार दिनभर गुलज़ार,

 

सादिक सिद्दीक़ी,

कांधला कस्बे में बुधवार को साप्ताहिक बंदी के आदेशों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। प्रशासनिक आदेश मानो सिर्फ कागज़ों में सिमटकर रह गए हों, जबकि ज़मीनी हकीकत में पूरा कस्बा दिनभर बाजार की चहल-पहल से गूंजता रहा। अधिकारी कुर्सियों पर आराम फरमाते रहे और व्यापारी नियमों को ठेंगा दिखाकर अपने प्रतिष्ठान खुलेआम चलाते नज़र आए।

 

जिला प्रशासन द्वारा बुधवार को कांधला में साप्ताहिक अवकाश घोषित किया गया था लेकिन कस्बे मे बुधवार को बाजारों को तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी। सुबह से ही दुकानों के शटर उठने लगे कपड़ों की दुकानें, जनरल स्टोर, ब्यूटी पार्लर, हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल की दुकानें सभी दिनभर गुलज़ार रहीं। बंदी के नाम पर सिर्फ कुछेक दुकानें ही बंद दिखीं, बाकी ने तो जैसे “बंदी” शब्द का मज़ाक उड़ा दिया हो। ऐसा लगा मानो सबकुछ “सब ठीक है” की रिपोर्ट पर चल रहा हो। व्यापारी निडर होकर ग्राहकों की भीड़ में व्यस्त रहे, और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहा। स्थानीय लोगों का गुस्सा भी अब उबलने लगा है।

लोगों का कहना है, “जब आदेश सिर्फ दफ्तर की फाइलों में दबे रहें और अधिकारी मैदान में न उतरें, तो कानून का डर कौन मानेगा? प्रशासन अगर गंभीर नहीं हुआ, तो आगे नियमों की कोई अहमियत नहीं बचेगी।”

कस्बे के केराना मार्ग, गंगेरू मार्ग, रेलवे रोड और बाजार चौक हर जगह यही नज़ारा देखने को मिला। दुकानों पर रौनक, ग्राहकों की भीड़ और मुनाफे की खनक..मानो साप्ताहिक बंदी नाम की कोई चीज़ अस्तित्व में ही न हो।

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