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नमाज़ को लेकर इकरा हसन का यूपी सरकार पर हमला: कहा कि नफ़रत फैलाने का ले लिया है ठेका!

मुस्लिम समुदाय बोला- ‘नमाज़ पढ़ना हमारा अधिकार, अनुमति की ज़रूरत नहीं

समाजवादी पार्टी के नेताओं का समर्थन, यूपी सरकार पर बढ़ा दबाव

 

कैराना (उत्तर प्रदेश): समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद इकरा हसन ने सड़क पर नमाज़ पढ़ने को लेकर उठे विवाद पर यूपी सरकार को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार “नफ़रत फैलाने का ठेका लेकर विभाजन की राजनीति” कर रही है। इकरा ने ज़ोर देकर कहा कि नमाज़ महज़ 10 मिनट की होती है और ईदगाह के बाहर नमाज़ पढ़ने की प्रथा वर्षों पुरानी है, जो केवल भीड़ बढ़ने पर ही अपनाई जाती है।

परंपरा vs राजनीति” का आरोप

इकरा हसन ने कहा कि सरकार का फ़ोकस जनता को लड़ाने पर है, जबकि उन्हें एकजुट करने की ज़रूरत है। नमाज़ के नाम पर बवाल खड़ा करना सियासी एजेंडे का हिस्सा है। उनके इस बयान को समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने भी समर्थन दिया। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा सरकार धर्म के नाम पर समाज को बाँटकर सत्ता बचाना चाहती है।

मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया

इस मामले में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी स्पष्ट रुख अपनाया है। कैराना के एक स्थानीय निवासी मोहम्मद शरीफ़ ने कहा कि नमाज़ पढ़ना हमारा संवैधानिक अधिकार है। हमें किसी की इजाज़त लेने की ज़रूरत नहीं। अधिकतर लोगों ने इकरा हसन के बयान की सराहना करते हुए कहा कि वह “साम्प्रदायिक एजेंडे के खिलाफ़ मुखर आवाज़” उठा रही हैं।

सरकार पर बढ़ता दबाव

इकरा के बयान के बाद यूपी सरकार की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने माँग की है कि सरकार “नफ़रत की राजनीति” छोड़कर सभी समुदायों के हितों को प्राथमिकता दे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सपा और भाजपा के बीच तनाव बढ़ा सकता है।

क्या कहता है इतिहास?

स्थानीय लोगों के अनुसार, कैराना की ईदगाह में जब भीड़ अधिक होती है, तो लोग सड़क किनारे नमाज़ अदा करते आए हैं। इस पर पहले कभी विवाद नहीं हुआ, लेकिन हाल में कुछ हिंदू संगठनों ने इसे “जानबूझकर की गई कार्रवाई” बताया। प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए नमाज़ के लिए अलग स्थान निर्धारित करने की बात कही है, जिसे मुस्लिम समुदाय ने “अधिकारों में दखल” बताया।

समाधान होगा या गहराएगा विवाद?

इकरा हसन के बयान ने मुस्लिम समुदाय में एक नई उम्मीद जगाई है। हालाँकि, सरकार अभी तक इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से कतरा रही है। देखना है कि यूपी सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाते हुए समाधान की ओर बढ़ेगी या फिर विवाद और गहराएगा।

 

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