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देशभर में शांतिपूर्वक वक़्फ़ बिल विरोध के बीच मनाया गया जुमतुल-विदा; अमन चैन और आपसी सौहार्द के लिए मांगी दुआएं

वक्फ बिल विरोध में जुमतुल-विदा पर काली पट्टी बांधकर नमाज़, देशभर में मुस्लिम समुदाय का प्रदर्शन

मुस्लिम संपत्तियों,मस्जिदों पर कब्जे की साज़िश? AIMPLB ने वक्फ संशोधन विधेयक को बताया ‘मुस्लिम विरोधी

मंदिरों में मुसलमानों को मिले प्रवेश तो मानें बराबरी : वक्फ बिल विरोध में उठी धर्मगुरुओं की आवाज़ 

 

कैराना। रमजान के आखिरी जुमे (जुमतुल विदा) के मौके पर देशभर के मुस्लिम समुदाय ने केंद्र सरकार के वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक के खिलाफ काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया और नमाज़ अदा कर मुल्क में अमन चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के आह्वान पर हुए इस विरोध प्रदर्शन में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने विधेयक को “मुस्लिम संपत्ति पर कब्जे की साजिश” बताया। कई शहरों में मस्जिदों के आसपास सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात रहे।

क्या है विवाद?

वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक में प्रस्तावित धारा के अनुसार, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। AIMPLB ने इसे “संवैधानिक अधिकारों पर हमला” बताते हुए कहा कि यह विधेयक मुसलमानों को उनकी मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों और कब्रिस्तानों से वंचित करने की सोची-समझी रणनीति है। बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने कहा कि अगर सरकार बराबरी की बात करती है, तो मंदिर-मठों में भी मुसलमानों को प्रतिनिधित्व दें।

कैराना से उठी अमन की दुआ

उत्तर प्रदेश के कैराना में शाही जामा मस्जिद में नमाज के दौरान समुदाय ने वक्फ बिल के विरोध के साथ ही देश में शांति और सद्भाव की दुआएं भी की। प्रदर्शनकारियों ने काले बैंड लगाकर सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की। AIMPLB की ओर से जारी बयान में चेतावनी दी गई कि इस कानून के पास होने से सैकड़ों धार्मिक-सामाजिक संस्थान मुसलमानों के हाथ से निकल जाएंगे।

AIMPLB का आरोप – “सरकारी हस्तक्षेप अस्वीकार्य”

बोर्ड ने अपने पत्र में कहा कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन धार्मिक स्वायत्तता का मामला है और सरकार का इसमें हस्तक्षेप संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है। रहमानी ने ज़ोर देकर कहा कि “शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार है। हम इसे इस्तेमाल करेंगे।”

AIMPLB ने सभी मुस्लिम संगठनों और नागरिक समाज से विधेयक के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया है। साथ ही, विपक्षी दलों से संसद में इस मुद्दे को उठाने की अपील की गई है। विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार और मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

 

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