स्टार्टअप्स को सेमीकंडक्टर, एआई और रोबोटिक्स पर ध्यान देना चाहिए: पीयूष गोयल
किराना डिलीवरी और लग्जरी ब्रांड्स को ‘रियल स्टार्टअप’ नहीं मानते गोयल, चीन से तुलना कर दिया सवाल
विदेशी पूंजी पर निर्भरता घटाने और स्वदेशी निवेश बढ़ाने का आह्वान, स्टार्टअप महाकुंभ में गोयल ने दिया ये मंत्र
नई दिल्ली, 4 अप्रैल: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को भारत मंडपम में आयोजित स्टार्टअप महाकुंभ 2025 के मंच से देश के उद्यमियों को तकनीकी नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स को सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहिए, न कि केवल किराना डिलीवरी या आइसक्रीम बनाने तक सीमित रहना चाहिए।
“अरबपतियों के बच्चों के ब्रांड्स स्टार्टअप नहीं”
गोयल ने कार्यक्रम में अपने संबोधन में तीखा टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं पूरे देश में कई अरबपतियों के बच्चों को फैंसी कुकीज, आइसक्रीम या लग्जरी उत्पादों का ब्रांड बनाते देखता हूँ। इसमें गलत कुछ नहीं है, लेकिन क्या यही भारत की नियति है? क्या हम डिलीवरी बॉय और गर्ल्स बनकर खुश हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रोजेक्ट्स उद्यमिता तो हैं, लेकिन वास्तविक स्टार्टअप नहीं, जो देश को भविष्य के लिए तैयार करें।
चीनी स्टार्टअप से तुलना
मंत्री ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की तुलना चीन से करते हुए कहा कि दूसरी तरफ़ (चीन) रोबोटिक्स, 3डी मैन्युफैक्चरिंग और नेक्स्ट-जनरेशन फैक्ट्रियों पर काम कर रहा है। हमें आइसक्रीम या चिप्स बनाने के बजाय तकनीकी क्षेत्रों में बड़े इनोवेशन पर फोकस करना होगा।
सरकार देगी पूरा साथ
गोयल ने युवा उद्यमियों को आश्वासन दिया कि सरकार चुनौतियों का सामना कर रहे स्टार्टअप्स का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि हम आपको दृढ़ रहने और बार-बार प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। साथ ही, उन्होंने घरेलू पूंजी निवेशकों की भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि विदेशी निवेश पर निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए स्वदेशी निवेश ज़रूरी है।
क्या है स्टार्टअप महाकुंभ?
स्टार्टअप महाकुंभ 2025 एक राष्ट्रीय स्तर का आयोजन है, जिसमें देशभर के नवोन्मेषक, निवेशक और नीति निर्माता शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देना और ग्लोबल चुनौतियों के समाधान के लिए तकनीकी समाधानों को बढ़ावा देना है। गोयल के इस संदेश को उद्योग जगत में भारत के ‘टेक जाइंट’ बनने की दिशा में एक स्पष्ट रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।