वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर AIMPLB ने राष्ट्रपति से मांगी तत्काल मुलाकात
वक्फ संस्थानों की स्वायत्तता खतरे में,” मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई चिंता
संसद से पारित विधेयक पर रोक की गुहार, राष्ट्रपति को पत्र में उठाए सवाल
नई दिल्ली, 4 अप्रैल। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने संसद द्वारा पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के समक्ष तत्काल रोकने की मांग करते हुए उनसे आपातकालीन मुलाकात का अनुरोध किया है। बोर्ड का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संस्थानों के प्रशासनिक ढांचे और स्वायत्तता के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
AIMPLB के प्रवक्ता एस.क्यू.आर. इलियास ने शुक्रवार को बताया कि बोर्ड के महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुजद्ददी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में इस विधेयक के प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। पत्र के अनुसार, संशोधन में वक्फ परिसंपत्तियों के प्रबंधन, नियंत्रण और निगरानी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है, जिससे धार्मिक एवं धर्मार्थ गतिविधियों का संचालन प्रभावित होने का खतरा है।
क्यों है विवाद?
वक्फ संस्थाएं भारत में मुस्लिम समुदाय की धार्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक सेवाओं के लिए समर्पित हैं। बोर्ड का दावा है कि नए संशोधनों से सरकार को इन संस्थानों के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप का अधिकार मिल जाएगा, जो “वक्फ अधिनियम, 1995” की मूल भावना के खिलाफ है। इलियास ने कहा, “यह बदलाव वक्फ की स्वतंत्र पहचान और ऐतिहासिक भूमिका को कमजोर करेगा। हम चाहते हैं कि राष्ट्रपति महोदया इस पर पुनर्विचार करें।”
राष्ट्रपति से अपील
पत्र में जोर देकर कहा गया है कि विधेयक को मंजूरी देने से पहले मुस्लिम समुदाय की आशंकाओं को सुनना जरूरी है। एआईएमपीएलबी ने इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के साथ विस्तृत चर्चा की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार का कहना है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन और दुरुपयोग रोकने के लिए है, लेकिन बोर्ड इसे “अधिकारों पर हमला” मानता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केंद्र और मुस्लिम संगठनों के बीच तनाव बढ़ा सकता है। विधेयक पर राष्ट्रपति की मुहर लगने तक इस मामले में नई कार्यवाही की संभावना है।