छात्रों के लिए खुशखबरी! 2026 से सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार: मसौदा मंजूर, जनता से सुझाव आमंत्रित
नई दिल्ली, 28 फरवरी 2024: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एक बड़े बदलाव की घोषणा करते हुए वर्ष 2026 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। मंगलवार को हुई बोर्ड की बैठक में इस संबंध में मसौदा मानदंडों को मंजूरी मिली। अधिकारियों के अनुसार, यह मसौदा अब जनसामान्य के लिए उपलब्ध कराया जाएगा और 9 मार्च 2025 तक हितधारक इस पर अपने सुझाव दे सकते हैं।
दो बार परीक्षा का प्रारूप
2026 के शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं वार्षिक के बजाय वर्ष में दो बार – फरवरी-मार्च और दूसरी बार मई में — आयोजित की जाएंगी।
छात्रों को दोनों में से बेहतर स्कोर को अंतिम अंक पत्र में शामिल किया जाएगा।
लचीलापन और दबाव कम करना
इस कदम का उद्देश्य छात्रों को अधिक अवसर देकर परीक्षा के तनाव को कम करना और उनके सीखने के अनुभव को सुदृढ़ बनाना है।
यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सिफारिशों के अनुरूप है, जो “बोर्ड परीक्षाओं के भार” में कमी की वकालत करती है।
सार्वजनिक सुझावों का आह्वान
मसौदा दस्तावेज़ सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। शिक्षक, अभिभावक, छात्र और शिक्षा विशेषज्ञ 9 मार्च तक अपनी प्रतिक्रियाएं जमा कर सकते हैं।
सभी फीडबैक का विश्लेषण करने के बाद ही नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संभावित लाभ
छात्रों को अपने प्रदर्शन को सुधारने का दूसरा मौका मिलेगा।
स्कूलों के लिए भी यह व्यवस्था लचीले शैक्षणिक कैलेंडर को बढ़ावा देगी।
सीबीएसई ने कहा कि यह परिवर्तन शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक कदम है। हालांकि, विस्तृत परीक्षा तिथियां, पाठ्यक्रम विभाजन, और मूल्यांकन प्रक्रिया जैसे पहलुओं को अभी अंतिम रूप देना बाकी है। शिक्षा मंत्रालय से अनुमोदन के बाद ही 2026 से नई व्यवस्था लागू होगी।
प्रतिक्रियाएं
शिक्षाविदों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे “प्रगतिशील” बताया है, लेकिन कुछ का मानना है कि स्कूलों को बुनियादी ढांचागत समर्थन और शिक्षक प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। अभिभावक संघों ने भी इसकी सराहना की है, पर साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा है कि दोनों परीक्षाओं के बीच छात्रों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
इस नए प्रारूप से भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है, जो छात्रों को न केवल अकादमिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाएगा।