परमिट की आड़ में हरियाली पर वार! कांधला में धड़ल्ले से कट रहे फलदार पेड़

 

 

कांधला। क्षेत्र में इन दिनों लकड़ी माफियाओं का बोलबाला देखने को मिल रहा है। हरे-भरे आम और अन्य फलदार पेड़ों पर खुलेआम आरा चलाया जा रहा है। एक ओर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और पेड़ बचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांधला क्षेत्र में लगातार हरे-भरे पेड़ों का कटान होने से सरकार की नीतियों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

सूत्रों की मानें तो परमिट के नाम पर हरे-भरे पेड़ों का कटान धड़ल्ले से कराया जा रहा है। कांधला क्षेत्र के गांव जसाला में एक बार फिर हरे-भरे आम के बाग में कटान शुरू होने की चर्चा पूरे क्षेत्र में जोरों पर है। बताया जा रहा है कि यहां युद्ध स्तर पर पेड़ों की कटाई की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इस समय आम के पेड़ों पर फल लगना शुरू हो चुका है, ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर फलदार और हरे-भरे पेड़ों को काटने के लिए वन विभाग ने परमिट कैसे जारी कर दिया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की मिलीभगत से हरे-भरे पेड़ों का लगातार सफाया किया जा रहा है। आम के पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह पेड़ों का कटान जारी रहा तो पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा और आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अरविंद कुमार से मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, पेड़ों के कटान पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

वहीं मामले में रेंजर राजेश कुमार का कहना है कि बाग में 60 पेड़ काटने का परमिट लिया गया है। उन्होंने बताया कि परमिट जारी होने से पहले उद्यान विभाग की रिपोर्ट लगती है, उसके बाद ही अनुमति दी जाती है।

हालांकि क्षेत्र में चल रही पेड़ों की कटाई को लेकर अब लोगों के मन में यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि जब सरकार “पेड़ बचाओ, पर्यावरण बचाओ” का संदेश दे रही है, तो फिर कांधला में हरे-भरे बाग आखिर किसके संरक्षण में कट रहे हैं?

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