दुआओं और इबादत के साथ अदा हुआ रमज़ान का तीसरा जुम्मा,अमन-चैन की मांगी दुआ

 

तीसरे जुम्मे पर नमाजियों से भर गईं मस्जिदें, मुल्क में अमन-चैन की उठीं दुआएं

 

सादिक सिद्दीक़ी,

 

कांधला। माहे रमज़ान का तीसरा जुम्मा कस्बे में पूरे अकीदत और रूहानी माहौल के साथ अदा किया गया। कस्बे की मस्जिदों में हजारों की तादाद में नमाजियों ने नमाज़-ए-जुमा अदा की। नमाज़ के दौरान मस्जिदों के अंदर और बाहर तक नमाजियों की कतारें दिखाई दीं और पूरा माहौल इबादत और रूहानियत में डूबा नजर आया।

खुतबे से पहले मौलानाओं ने रोज़े की अहमियत और रमज़ान की बरकतों पर रोशनी डालते हुए कहा कि रमज़ान सिर्फ भूख और प्यास का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने गुनाहों की माफी मांगने, सब्र करने और नेकियों को बढ़ाने का महीना है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वे अपनी आंखों, जुबान, कान और हाथों को भी हर तरह के गुनाह से बचाएं, तभी रोज़े का असली मकसद पूरा होता है।

मौलाना ने कुरान की आयत का हवाला देते हुए कहा कि “जो एक इंसान का नाहक कत्ल करता है, वह पूरी इंसानियत का कत्ल करता है और जो एक जिंदगी बचाता है, वह पूरी इंसानियत को बचाता है।” उन्होंने समाज में अमन, मोहब्बत और इंसाफ का पैगाम देते हुए कहा कि मजलूम की मदद करना और जालिम के खिलाफ खड़ा होना भी ईमान का हिस्सा है।

नमाज़ अदा करने के बाद अकीदतमंदों ने मुल्क में अमन-चैन, भाईचारा और तरक्की के लिए खास दुआएं मांगी। मस्जिदों के आसपास के बाजारों में भी रौनक देखने को मिली। बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान सभी के चेहरों पर इबादत और खुशी की चमक साफ दिखाई दी

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