
तपती गर्मी में सुन्ना गांव प्यासा, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल”
* सरकारी हैंडपंप बने शोपीस, दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण युवाओं ने सोशल मीडिया पर खोला मोर्चा
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला क्षेत्र के सुन्ना गांव में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गांव के अधिकांश सरकारी हैंडपंप खराब पड़े होने से ग्रामीणों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को दूर-दराज क्षेत्रों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। वहीं, गांव के युवाओं ने सोशल मीडिया के जरिए प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए तत्काल समाधान की मांग की है।ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लगे ज्यादातर सरकारी हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। तपती गर्मी में पानी के लिए भटक रहे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों को लिखित व मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।गांव निवासी मिंटू ने बताया कि गांव के लगभग सभी सरकारी नल खराब पड़े हैं। जो एक-दो हैंडपंप चालू हैं, उनमें भी साफ पानी नहीं आ रहा। दूषित पानी के कारण गांव में बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। लोगों को मजबूरी में वही गंदा पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
वहीं ग्रामीण अक्षय ने चिंता जताते हुए कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही। प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा सीधे गांव के गरीब और मजदूर तबके को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीण दीपक ने भी जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि गांव में पीने योग्य पानी की भारी कमी है, लेकिन जिम्मेदार लोग सिर्फ आश्वासन देने में लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब परिवार सबसे ज्यादा परेशान हैं और उनकी सुनने वाला कोई नहीं।
मामले में ग्राम प्रधान रविंदर ने बताया कि खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही गांव की पेयजल व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाएगी और सभी खराब हैंडपंपों को ठीक कराया जाएगा।