बारिश की तेज़ धाराओं में भी थानाध्यक्ष सड़कों पर डटे, जनता बोली“ये हैं असली जनसेवक”

 

अपराधियों के खिलाफ उनकी सख्ती और जनता के बीच उनकी सादगी ने पुलिस की छवि को और मजबूत किया है।

 

सादिक सिद्दीक़ी.

कांधला (शामली)। बरसात की भारी बूंदें आसमान से बरस रही थीं। सड़कों पर घुटनों तक पानी भरा हुआ था। दुकानों के शटर गिर चुके थे और लोग अपने घरों में दुबक गए थे। लेकिन इसी दौरान कस्बे की सड़क पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी के दिल को छू लिया। बारिश की मूसलधार धाराओं में भीगते हुए, वर्दी पहने, हाथ में वायरलेस लिए और नज़रों में सिर्फ जिम्मेदारी का जज़्बा लिए खड़े थे थाना कांधला के थानाध्यक्ष सतीश कुमार।बरसात में जहाँ लोग अपने घरों से बाहर निकलने से कतराते हैं, वहीं थानाध्यक्ष सतीश कुमार लगातार सड़कों पर गश्त करते रहे। दिल्ली बस स्टैंड, मुख्य बाज़ार और कस्बे की तंग गलियों में उनकी मौजूदगी ने जनता को भरोसा दिलाया कि पुलिस हर हाल में उनके साथ है।

लोगों का कहना था कि –

“हम बारिश से बचने के लिए घरों में थे, लेकिन थानाध्यक्ष साहब हमारे लिए पानी में भीग रहे थे।”

“यह नजारा बताता है कि सच्चे पुलिसवाले वही होते हैं, जो हर परिस्थिति में जनता के लिए खड़े रहते हैं।” थानाध्यक्ष की पहचान सख्ती और संवेदनशीलता

सतीश कुमार अपने सख्त रवैये और संवेदनशील छवि के लिए जाने जाते हैं।अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाकर उन्होंने कस्बे में शांति कायम की। गैंगस्टर और वारंटियों की धरपकड़ में खुद मैदान में उतरकर टीम का नेतृत्व किया।कस्बे के हर चौराहे पर उनकी सक्रियता जनता के लिए सुरक्षा की गारंटी बन चुकी है।

उनका कहना है कि “पुलिस की वर्दी पहनना केवल नौकरी नहीं, बल्कि यह जिम्मेदारी है कि हर हालात में जनता सुरक्षित रहे।” जनता ने थानाध्यक्ष सतीश कुमार की ड्यूटी भावना को खुलकर सराहा।लोगों ने कहा – “बरसात हो या धूप, दिन हो या रात, सतीश कुमार हमेशा ड्यूटी पर डटे रहते हैं।”हम पुलिस को अक्सर कोसते हैं, लेकिन ऐसे अफसरों पर हमें गर्व होना चाहिए।” “वर्दी पहनना सबके बस की बात नहीं, इसके लिए हिम्मत और त्याग चाहिए।”

सतीश कुमार की कार्यशैली और निष्ठा ने कांधला की जनता का भरोसा और गहरा कर दिया है। अपराधियों के खिलाफ उनकी सख्ती और जनता के बीच उनकी सादगी ने पुलिस की छवि को और मजबूत किया है।

बरसात की फुहारें चाहे जितनी तेज़ हों, थानाध्यक्ष सतीश कुमार जैसे अफसरों की मौजूदगी जनता के दिलों में यह भरोसा जगाती है कि “हम सुरक्षित हैं, क्योंकि वर्दी वाले हमारे साथ हैं।”

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