कांधला में आवारा कुत्तों का आतंक: चेहरे पर हमले के बाद इलाज के दौरान चाय विक्रेता की मौत!
नगर पालिका की लापरवाही का शिकार? रेबीज इलाज के बावजूद राजीव की जान नहीं बची!
एक सप्ताह में तीन अस्पतालों का सफर, फिर भी नहीं रुका मौत का साया!
कांधला। बुधवार की सुबह, कांधला के राजीव नगर निवासी 55 वर्षीय राजीव शर्मा (एक चाय स्टाल संचालक) का पागल कुत्ते के काटने के बाद उपचार के दौरान निधन हो गया। घटना तब हुई जब वह रात में दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। बाइक से जाते समय बुढ़ाना तिराहे के पास एक आवारा हिंसक कुत्ते ने उनके चेहरे पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद परिजनों ने राजीव को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कांधला ले जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई। हालांकि, उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और तेज बुखार व हाइड्रोफोबिया के लक्षण दिखाई देने लगे। इसके बाद:
दिल्ली रेफर: सीएचसी से उन्हें दिल्ली के एमवीआईडी अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहाँ भी इलाज नाकाम रहा।
निजी अस्पताल में भर्ती: अंत में एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहाँ मंगलवार को उनकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप: “डॉक्टरों ने समय पर सही इलाज नहीं दिया। अगर तुरंत रेबीज का इंजेक्शन लगा दिया जाता तो जान बच सकती थी”।
राजीव की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। उनके पास दो बच्चों की जिम्मेदारी थी, और चाय स्टाल से होने वाली सालाना 3 लाख रुपये की आय अब बंद हो गई है। गमगीन माहौल में बुधवार को उनका दाह संस्कार किया गया।
नगर पालिका की जिम्मेदारी
इस मामले ने स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को फिर उजागर किया है। गौरतलब है कि मई 2025 में ही शामली उपभोक्ता आयोग ने एक अन्य मामले में कांधला नगर पालिका के ईओ पर 3.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, जहाँ पागल कुत्ते के काटने से एक किसान की मौत हुई थी। आयोग ने इसे “सेवा में घोर लापरवाही” बताया था।
क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएँ?
- आवारा जानवरों पर नियंत्रण न होना: नगर पालिका द्वारा कुत्तों, बंदरों आदि को पकड़ने की व्यवस्था नाकाफी है।
- चिकित्सकीय लापरवाही: सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता के बावजूद समय पर सही इलाज न मिलना।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, कुत्ते के काटने के 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना जान बचा सकता है। साथ ही, आइसोलेशन वार्ड में तत्काल उपचार आवश्यक है क्योंकि रेबीज से पीड़ित व्यक्ति हिंसक व्यवहार कर सकता है।
परिवार ने प्रशासन से मुआवजे और कार्रवाई की मांग की है। इसी तरह के मामलों में उपभोक्ता आयोग के आदेश के बाद भी नगर पालिका द्वारा आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान नहीं चलाया गया है।