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धार्मिक नेता के अल्टीमेटम के बाद दबाव में में पुलिस, हत्यारोपियों पर रासुका लगाने का ऐलान!

कैराना/शामली, 21 जून। हरियाणा के किसान देवेंद्र देशवाल (निवासी: पानीपत) की निर्मम हत्या के बाद उबले सामाजिक तनाव को केंद्र में रखते हुए शनिवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। बघरा आश्रम के स्वामी यशवीर महाराज द्वारा महापंचायत की धमकी के बाद मजबूरन पुलिस प्रशासन ने आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके बाद महाराज ने 27 जून को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन और महापंचायत को स्थगित कर दिया है।

आपको बता दें कि 16 जून को शामली जिले के गाँव मामौर के जंगल में देवेंद्र देशवाल को चाकुओं से गोदकर गोली मारी गई। मृतक के पुत्र रोहित ने ग्रामीण नदीम, शोबान और फरमान के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया।

पुलिस ने घटना के दिन ही फरमान और नदीम को गिरफ्तार कर लिया। नदीम को मुठभेड़ में गोली लगी, जबकि शोबान अस्पताल में इलाजरत है।

 

सोशल मीडिया पर आक्रोश:

19 जून को मृतक के भाई राजेश का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। 20 जून को स्वामी यशवीर महाराज ने एक और वीडियो जारी कर आरोपियों को “जेहादी” बताते हुए रासुका लगाने की मांग की। साथ ही, 27 जून को महापंचायत बुलाने की चेतावनी दी।

महाराज ने आरोपियों द्वारा फैलाई जा रही अफवाह (मृतक का किसी महिला से अवैध संबंध) को “सफेद झूठ” बताया।

प्रशासनिक कार्रवाई:

रासुका का आश्वासन: यशवीर महाराज के वीडियो वायरल होते ही शामली पुलिस सक्रिय हुई। शनिवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आरोपियों पर रासुका और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की घोषणा की गई।

 

महापंचायत स्थगन: पुलिस के कदम से संतुष्ट होकर महाराज ने धरना और महापंचायत रद्द की। उन्होंने शामली प्रशासन का आभार जताया, साथ ही चेतावनी दी कि भविष्य में न्याय मिलने में देरी होने पर आंदोलन फिर शुरू किया जा सकता है।

सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव:

साम्प्रदायिक तनाव: महाराज के वीडियो में “कैराना को कश्मीर न बनने दें” जैसे बयानों से हिंदू समाज में आक्रोश व्याप्त था। पुलिस ने अफवाहों को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कार्रवाई की।

प्रशासन की सक्रियता: केस की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी शामली ने विशेष टीम गठित की। आरोपियों पर हत्या के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुँचाने का भी मामला दर्ज किया गया।

विशेषज्ञ दृष्टिकोण:

कानूनी पहलू: रासुका लगाने से आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकेगी और पुलिस को बिना चार्जशीट के 12 महीने तक हिरासत में रखने का अधिकार मिल जाएगा। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से सामुदायिक तनाव कम होने की उम्मीद है।

इस घटना ने प्रशासनिक दबाव और धार्मिक आंदोलनों के बीच संवेदनशील संतुलन को उजागर किया है। पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया से बड़े टकराव को टाला जा सका, लेकिन दीर्घकालिक शांति के लिए न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक होगा।

 

 

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