कैंपा कोल्ड ड्रिंक के दामों में हेराफेरी और छोटे दुकानदारों का शोषण!
एजेंसी के ज़ोर-ज़बरदस्ती में फँसे दुकानदार! कैंपा बोतल की पेटी 360 के बजाय 430 रुपये में खरीदने को मजबूर!
छापेमारी का निशाना गलत: अधिकारी दुकानों पर टूट पड़े, जबकि एजेंसियों की मनमानी पर मौन!
रिलायंस की वापसी के बीच कैंपा एनर्जी बोतल की पेटी का असली दाम 560, लेकिन एजेंसी 600 रुपये में बेच रही!
कांधला/ सहमली, 09 जून: छोटे दुकानदारों पर कैंपा कोल्ड ड्रिंक की एजेंसियों द्वारा जबरदस्ती कीमतें थोपने और अधिकारियों की गलत निशानेबाजी का मामला गरमाता जा रहा है। ट्रेडर्स के अनुसार, कैंपा कोला की 600 मिली बोतल की पेटी का अधिकृत मूल्य 360 रुपये है, लेकिन एजेंसियाँ इसे 430 रुपये में बेच रही हैं। दुकानदार मजबूरी में इसे खरीदते हैं और एमआरपी पर बेचने की कोशिश करते हैं, लेकिन अधिकारी सीधे उनकी दुकानों पर छापेमारी कर जुर्माना लगा देते हैं।
एनर्जी ड्रिंक में भी हेराफेरी
इसी तरह, कैंपा एनर्जी ड्रिंक की पेटी का वास्तविक मूल्य 560 रुपये है, लेकिन एजेंसियाँ इसे 600 रुपये में दे रही हैं। दुकानदारों का कहना है कि वे यह बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकते, क्योंकि बाज़ार में पहले से ही पेप्सी और कोका-कोला का दबदबा है।
अधिकारियों की गलत रणनीति
दुकानदारों की शिकायत है कि अधिकारी उन पर छापेमारी करने के बजाय एजेंसियों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते? एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “हमें एजेंसी से ही ऊँचे दाम पर सामान लेना पड़ता है। अगर हम शिकायत करें, तो सप्लाई रोक दी जाती है।”
रिलायंस की वापसी और बाज़ार की चुनौतियाँ
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब रिलायंस ने 22 करोड़ रुपये में कैंपा ब्रांड खरीदकर इसे भारतीय बाजार में फिर से लॉन्च किया है। कंपनी का लक्ष्य पेप्सी (34% बाज़ार) और कोका-कोला (51% बाज़ार) की दबंगई को चुनौती देना है। हालाँकि, एजेंसियों की मनमानी से इस पहल को झटका लग सकता है।
विशेषज्ञों की राय
आईपी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. सुधीर बिष्ट का कहना है, “रिलायंस को बाज़ार में टिकने के लिए सप्लाई चेन की निगरानी ज़रूरी है। छोटे दुकानदारों का शोषण ब्रांड की छवि खराब करेगा।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बिना ठोस विज्ञापन और पारदर्शी वितरण के कैंपा की वापसी मुश्किल होगी।
कार्रवाई की माँग
दुकानदार संगठन अब राज्य सरकार और रिलायंस प्रबंधन से हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अगर एजेंसियों पर लगाम नहीं कसी गई, तो कैंपा की “द ग्रेट इंडियन टेस्ट” मुहिम विफल हो जाएगी। साथ ही, वे अधिकारियों से छापेमारी का फोकस गलत दुकानों की बजाय एजेंसियों पर केंद्रित करने की अपील कर रहे हैं।
रिलायंस की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। खबर के अपडेट मिलते ही इसे जोड़ा जाएगा।