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पहलगाम हमले के बाद एकता का संदेश: नजमुल इस्लाम ने कहा, ‘आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष में अमन और इंसानियत का साथ दें!

कांधला नगर प्रमुख ने शोक जताया: ‘बेगुनाहों की मौत ने देश की आत्मा को ठेस पहुंचाई है!

सामूहिक प्रयास की पुकार: नजमुल इस्लाम ने कहा, ‘इस वक्त बिखराव नहीं, एकजुटता की जरूरत!

कांधला। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले ने देशभर में सदमे की लहर दौड़ा दी है। इस हमले में 28 पर्यटकों सहित 27 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हुए, जिनमें नेपाल और यूएई के नागरिक भी शामिल हैं 58। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली है।

कांधला नगर पालिका अध्यक्ष नजमुल इस्लाम ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए एकता और सामूहिक संघर्ष का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती समय में स्वास्थ्य समस्याओं के कारण वे इस घटना से अनजान रहे, लेकिन जानकारी मिलते ही उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ एकजुटता दिखाई। उनका कहना था कि यह समय विभाजन नहीं, बल्कि इंसानियत के नाम पर एक होने का है। हमें आतंकवाद की निंदा करते हुए शांति और न्याय के लिए लड़ना होगा।

घटना स्थल: पहलगाम के ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ नाम से मशहूर बैसरन घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया। यह क्षेत्र अमरनाथ यात्रा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

पीड़ितों में विविधता: मृतकों में यूपी, गुजरात, महाराष्ट्र, नेपाल और यूएई के नागरिक शामिल हैं। एक युवक शुभम द्विवेदी, जिसकी दो महीने पहले शादी हुई थी, भी हमले का शिकार हुआ।

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय निंदा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई दौरा छोड़कर दिल्ली लौटने का फैसला किया, जबकि अमेरिका, रूस और अन्य देशों ने हमले की कड़ी भर्त्सना की।

नजमुल इस्लाम ने समाज से तीन मुख्य अपीलें कीं:

आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक आवाज: “ऐसे हमले न केवल जानें लेते हैं, बल्कि समाज के विश्वास को तोड़ते हैं। हमें धर्म, जाति और राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा”।

मीडिया की भूमिका: उन्होंने मीडिया को सटीक जानकारी और संवेदनशील रिपोर्टिंग के लिए धन्यवाद दिया, जिससे जनजागरूकता बनी रही।

युवाओं को जोड़ने की आवश्यकता: “आतंकवाद की जड़ें गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा की कमी में हैं। युवाओं को रोजगार और सकारात्मक मार्गदर्शन देना होगा”।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिध्वनि:

कश्मीर का बदलता स्वरूप: पहली बार कश्मीर के अलगाववादी समूहों सहित स्थानीय नागरिकों ने आतंकवाद के खिलाफ प्रदर्शन किए, जो एक नए युग का संकेत है।

धार्मिक नेताओं की भूमिका: ऑल इंडिया सूफी काउंसिल के अध्यक्ष ने कहा कि इस्लाम में ऐसे हमलों की कोई जगह नहीं। यह धर्म नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वार्थ का खेल है।

नजमुल इस्लाम के अनुसार, “सुरक्षा बलों के प्रयासों के साथ-साथ नागरिक समाज को भी सक्रिय होना होगा।” इसी कड़ी में NIA की टीम ने घटना स्थल का मुआयना किया है, और सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा निलंबित कर दिए हैं।

पहलगाम हमला न केवल एक त्रासदी है, बल्कि यह समाज की एकजुटता और संवेदनशीलता की परीक्षा भी है। नजमुल इस्लाम जैसे नेताओं का आह्वान इस बात का प्रतीक है कि आतंकवाद से लड़ाई केवल सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जैसा कि क्रिकेटर गौतम गंभीर ने कहा, “भारत करारा जवाब देगा” वैसे ही समाज को भी इंसानियत के नाम पर एक होना होगा।

“आइए, हम सभी पीड़ितों की याद में दीप जलाएं और संकल्प लें कि नफरत के अंधेरे को एकता की रोशनी से मिटाएंगे।”

 

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