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सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल: रात्रि ड्यूटी में सोता नज़र आया पुलिस कांस्टेबल!

कांधला थाना क्षेत्र में लूटपाट के बीच पुलिस की लापरवाही, एक्सीडेंट और अपराध का डबल ख़तरा!

क्या पुलिसकर्मियों पर ड्यूटी का बोझ है ज़्यादा? सोते हुए कांस्टेबल का वीडियो हुआ वायरल!

 

शामली। कांधला: थाना कांधला क्षेत्र में पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और कर्मियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठे हैं। शुक्रवार रात दिल्ली बस स्टैंड के पास तैनात पुलिस कांस्टेबल योगेंद्र कुमार को ड्यूटी के दौरान सड़क किनारे सोता हुआ देखा गया। एक वायरल वीडियो में उन्हें गहरी नींद में सोते दिखाया गया है, जिसके बाद सुरक्षा चिंताओं के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही पर बहस तेज़ हो गई है।

वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि कांस्टेबल योगेंद्र कुमार दिल्ली रोड के व्यस्त बस स्टैंड क्षेत्र में कुर्सी बैठे सोए हुए हैं। यह इलाका न केवल रातभर व्यस्त ट्रैफिक वाला रहता है, बल्कि यहां ट्रैफिक का दबाव भी अधिक है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ड्यूटी के दौरान इस तरह की लापरवाही नागरिक सुरक्षा के लिए खतरनाक है। इसी क्षेत्र में कल रात एक शराब ठेकेदार से नकदी और सोने की चेन लूटी गई, जो इस मामले को और गंभीर बनाता है।

जहां एक ओर पुलिसकर्मी का सोना सुरक्षा व्यवस्था में चूक का प्रतीक है, वहीं यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अधिकारी अत्यधिक ड्यूटी के बोझ तले दबे हैं? स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात में ट्रैफिक की भीड़ के बीच सोना दुर्घटना को न्यौता देने जैसा है। हालांकि, प्रशासन ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

लूटपाट और सुरक्षा चूक का संबंध:

इस घटना से एक दिन पहले ही रात्रि में थाना कांधला क्षेत्र में एक शराब ठेकेदार की लूटपाट हुई। आरोप है कि पुलिस की गैर-मौजूदगी ने अपराधियों को हौसला दिया। स्थानीय व्यापारी संघ के प्रतिनिधि ने कहा कि यदि पुलिसकर्मी ड्यूटी में सो रहा है, तो आम जनता की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?

क्या ड्यूटी का बोझ है ज़िम्मेदार?

कुछ स्रोतों का दावा है कि पुलिसकर्मियों को लगातार लंबी शिफ्ट में ड्यूटी दी जाती है, जिससे थकान और लापरवाही बढ़ती है। पुलिस के एक पुलिसकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार पुलिस बल को बिना पर्याप्त संसाधन दिए अधिक काम का दबाव डाल रही है। हालांकि, यह तर्क नैतिक जवाबदेही से इनकार नहीं करता।

यह घटना न केवल व्यक्तिगत लापरवाही, बल्कि पुलिस प्रबंधन और सरकारी नीतियों की खामियों को भी उजागर करती है। जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों का समुचित आवंटन और कर्मियों की ड्यूटी व्यवस्था पर पुनर्विचार जरूरी है।

 

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