भूमाफिया

 

कांधला नगर पालिका पर भू-माफियाओं का साया! तालाब में कूड़ा डालकर कराई जा रही अवैध कब्जे की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां, तालाब संख्या 2626 को बर्बाद करने में जुटी नगर पालिका!

भू-माफियाओं का अवैध निर्माण बुल्डोज करते हुए प्रशासन ने बचाई तालाब की जमीन, पर सवाल: नगर पालिका की भूमिका संदिग्ध?

“सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धता बताते हुए भू-माफियाओं ने निगल लिए तालाब, अब अदालती सुरक्षा कवच से बचा है एकमात्र तालाब 2626”

शामली। कांधला (उप्र)। नगर पालिका परिषद कांधला पर तालाबों को नष्ट करने और भू-माफिया को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगे हैं। शहर के तालाब संख्या 2626 में नगर पालिका की ट्रैक्टर-ट्रॉली द्वारा लगातार कूड़ा डाला जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन भी हो रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह कार्रवाई तालाब के मूल स्वरूप को बिगाड़कर भू-माफिया को जमीन हड़पने में मदद करने के लिए की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट और राज्य सरकार ने देशभर में जल संरक्षण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत नगर पालिकाओं को तालाबों, जोहड़ों आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन कांधला नगर पालिका ने न केवल इन आदेशों की अनदेखी की, बल्कि ट्रैक्टर-ट्रॉली से तालाब संख्या 2626 में कूड़ा डलवाकर अवैध भराव की अनुमति देकर भू-माफियाओं को संरक्षण दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह की लापरवाही से नगर के अन्य तालाबों को भी नष्ट कर दिया गया।

अदालती स्टे ने बचाया आखिरी तालाब

तालाब संख्या 2626 को बचाने के लिए मुशर्रफ़ हसन और जुनैद अख़्तर समेत सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 2014 में न्यायालय में वाद (संख्या 326/14) दायर किया था। न्यायालय ने तालाब की जमीन पर किसी भी तरह के अतिक्रमण पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसी स्टे के कारण यह तालाब अब तक सुरक्षित है, जबकि नगर के अन्य जल स्रोत भू-माफियाओं की भेंट चढ़ चुके हैं

कल रात हुआ खुलासा, प्रशासन ने की कार्रवाई

गत शाम भू-माफिया ने तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन को सूचना दी तो मामले में हड़बड़ी मच गई। राजस्व टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बुल्डोजर की मदद से अवैध ढांचे को गिराकर तालाब की जमीन को कब्जामुक्त कराया। हालांकि, सवाल उठ रहे हैं कि नगर पालिका की मिलीभगत के बिना यह घटना कैसे संभव हुई?

जलस्तर में गिरावट, पर्यावरणीय संकट

स्थानीय पर्यावरणविदों का कहना है कि तालाबों के विलुप्त होने से क्षेत्र का जलस्तर लगातार गिर रहा है। नगर पालिका द्वारा तालाबों को नष्ट करने की कार्रवाई न केवल प्राकृतिक संपदा के साथ छेड़छाड़ है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट को भी न्यौता दे रही है।

नगर पालिका का रुख साफ नहीं

इस मामले पर नगर पालिका के अधिकारियों ने अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। हालांकि, प्रशासन ने तालाब की सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई है और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर नजर रखने का आश्वासन दिया है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि नगर पालिका ने अपनी गतिविधियां नहीं रोकीं, तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

नोट: यह ख़बर स्थानीय निवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के बयानों पर आधारित है। मामले की जांच अभी जारी है।

 

 

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