थाना प्रभारी द्वारा पुलिसकर्मियों के प्रति गाली गलौज करने का ऑडियो वायरल
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उक्त ऑडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है, जिसकी क्षेत्र में जोरो सोरों से चर्चाएं हो रही है।
सादिक सिद्दीकी
शामली.कांधला अभियोग के चलते लंबे समय से कोर्ट के समक्ष पेश ना होने को लेकर क्षेत्र के गांव भनेड़ा निवासी दो अभियुक्तों को पुलिस गिरफ्तार कर थाने ले आई थी,जिनको थाना प्रभारी ने थाने में ना रखने की बात कहते हुए घर भेज दिया। साथ ही थाना प्रभारी द्वारा अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लाने वाले पुलिसकर्मियों के प्रति भी गाली गलौज करने का मामला प्रकाश में आया है। मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बीते शुक्रवार को एलम चौकी पर तैनात चार पुलिसकर्मी दो बाईकों पर सवार होकर क्षेत्र के गांव भनेड़ा जाते है और लंबे समय से किसी मामले में न्यायालय के समक्ष पेश ना होने के कारण भनेड़ा निवासी अली मोहम्मद और कालिम को हिरासत में लेकर थाने ले जाते है।थाने पहुंचने के लगभग दो घंटे बाद दोनों अभियुक्त अपने गांव वापिस पहुंच जाते है। गांव में दोनों अभियुक्तों के दिखाई देने पर ग्रामीणों में चर्चाएं शुरू हो जाती है कि आखिर लंबे समय से न्यायलय में पेश ना होने के कारण पुलिस द्वारा हिरासत में लिए दोनो लोग गांव में कैसे घूम रहे है। दोनों लोगों को गांव में घूमते देख एक समाजसेवी ग्रामीण ने थाना प्रभारी क्षितिज कुमार को फोन किया। फोन पर हुई वार्ता इस प्रकार है,,
ग्रामीण-एसओ साहब नमस्कार
थाना प्रभारी-नमस्कार जी नमस्कार
ग्रामीण- कैसे हो साहब
थाना प्रभारी- मै बढ़िया हु जी बहुत
ग्रामीण- एक बात बताओ,मेरे से क्या नाराजगी चल रही है
थाना प्रभारी- मेरी कोई नाराजगी ना
ग्रामीण- अगर मैं एंटी करप्शन में हूँ और मेरे फोन नंबर पर लिखा आता है तो क्या कुछ गलत है
थाना प्रभारी- मै क्यों आपसे नाराज होता भैया ,आपका मेरा पुराना कोई सम्बन्ध है जो मैं आपसे नाराज हूंगा
ग्रामीण- अजी पता चला था कि वो विपिन जी से कह रहे थे एसओ साहब कि एंटी करप्शन लिखा आ रहा है
थाना प्रभारी- अरे तुम कुछ भी लिखो,एंटी करप्शन क्यों लिखो ,पुलिस लिखकर भेजो। उससे क्या मतलब है।
ग्रामीण- एसओ साहब मै क्या कह रहा था,ये जो योगेश शर्मा है दरोगा जी इन्होंने अली मोहम्मद और कामिल को उठाया था, दोपहर में दो बजे और तीन बजे, चार बजे उनको छोड़ दिया।
थाना प्रभारी- मैने थाने से भगा दिए। कही ले जा, चौकी ले जाओ। एन आई एक्ट के को क्यों रखूं रात में अपने थाने में। या तो ले के आओ टाइम से दाखिल करो तुम। रात में थाने में कोई मर गया , किसकी जिम्मेदारी होगी।
ग्रामीण- वो तो आप ही है जी जिम्मेदार
थाना प्रभारी- मै कोई मुलजिम बनूंगा क्या
ग्रामीण-जी सही बात है
थाना प्रभारी- ये जाने इसका काम जाने
ग्रामीण- तो इन्होंने छोड़ दिए। ये चार बजे गांव में आगे।
थाना प्रभारी- क्या छोड़ दिए,मैने यहां से भगा दिए है। अब ये जाने इसका काम जाने।
गाली देते हुए थाना प्रभारी- ये ,,,, पकड़कर ही गलत लाया। एन आई एक्ट वाले को तारीख की सूचना देते है,जाके कोर्ट में पेश हो ना कि गिरफ्तार करके लाते।
ग्रामीण- एनआईएक्ट में उठा के ले जाके पेश कर दे
थाना प्रभारी- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है,किताब पढ़ो दोबारा।
उक्त ऑडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है, जिसकी क्षेत्र में जोरी सोरों से चर्चाएं हो रही है।
अब सोचने वाली बात यह है कि क्या जो पुलिसकर्मी दोनों अभियुक्तों को गांव से उठाकर थाने लाए उनको कानून की जानकारी नहीं है। यदि जानकारी है तो उठाकर क्यों लाए। जिन पुलिसकर्मियों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं है , उच्चाधिकारियों द्वारा उनके विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उनको ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। अब देखना यह है कि जानकारी का अभाव अभियुक्तों को पकड़कर लाने वाले पुलिसकर्मियों को है या छोड़ने वाले थाना प्रभारी को है। ये तो उच्चाधिकारियों द्वारा माले में लिए गए संज्ञान के बाद ही पता चलेगा।