सपा नेताओं का दावा हिरासत और नज़रबंदी, कांधला में गरमाई राजनीतिक जंग

 

 

* ‘आवाज़ दबाने की कोशिश या कानून-व्यवस्था?’ कांधला में सपा का जोरदार प्रदर्शन, हिरासत और नज़रबंदी के आरोपों से गरमाई सियासत

 

सादिक सिद्दीक़ी

 

कांधला। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सम्मान, छात्रों और आंदोलनकारियों के अधिकारों के समर्थन में मंगलवार को कांधला में समाजवादी पार्टी का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया। प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने पुलिस-प्रशासन पर विरोध की आवाज़ दबाने के लिए सख्त कार्रवाई करने का आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि जिलाध्यक्ष सहित कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अलग-अलग थानों में हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ नेताओं को उनके घरों पर ही नज़रबंद रखा गया।

 

भभीसा निवासी वरिष्ठ सपा नेता सुरेश प्रधान ने दावा किया कि उन्हें देर रात पुलिस एस्कॉर्ट के साथ घर छोड़ा गया और उसके बाद उनके आवास पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया। उनका आरोप है कि उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ उठाना अपराध नहीं है और ऐसे कदम विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश हैं।

 

सपा नेताओं ने कहा कि पार्टी छात्रों, युवाओं, किसानों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रही है और आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा। उनका कहना है कि प्रशासनिक दबाव या पुलिस कार्रवाई से कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर नहीं होगा।

 

प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में पूरे दिन राजनीतिक हलचल बनी रही। समर्थकों और स्थानीय लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। सपा नेताओं ने कहा कि यदि लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश लगाने का प्रयास जारी रहा तो पार्टी भविष्य में भी बड़े स्तर पर जनआंदोलन करेगी।

 

समाचार लिखे जाने तक पुलिस एवं प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। इसलिए सपा नेताओं के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

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