
नहर की पटरी टूटते ही मचा हड़कंप, सड़क ध्वस्त, किसानों की बढ़ी चिंता
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। थाना क्षेत्र के गांव नाला के समीप स्थित छोटी नहर की पटरी तेज पानी के बहाव के कारण अचानक टूट गई, जिससे सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर बह गया। घटना के बाद वहां से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया, जबकि नहर का पानी आसपास के कृषि खेतों में फैलने से किसानों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग की टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के सहयोग से युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नहर में पानी का दबाव काफी अधिक था। अचानक पटरी बीच से कट गई और देखते ही देखते सड़क का बड़ा हिस्सा भी बह गया। सड़क टूटने से ग्रामीणों और राहगीरों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। वहीं नहर का पानी खेतों की ओर तेजी से बढ़ने लगा, जिससे खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका पैदा हो गई।
स्थानीय किसान मांगेराम ने बताया कि जिस स्थान पर पटरी टूटी है, वहां पहले से किसी जानवर द्वारा बनाया गया बिल था। पानी का दबाव बढ़ने पर उसी स्थान से कटाव शुरू हुआ और कुछ ही देर में पूरी पटरी टूट गई। इसके बाद पानी खेतों में फैल गया, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने तत्काल सिंचाई विभाग को सूचना देकर जल्द से जल्द कटाव रोकने और पटरी की मरम्मत कराने की मांग की। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कटाव पर काबू नहीं पाया जाता तो नहर का पानी और अधिक खेतों में फैल सकता है, जिससे फसलों को भारी नुकसान होने के साथ-साथ सड़क का बचा हुआ हिस्सा भी बह सकता है।
सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग हरकत में आ गया। विभाग के जिलेदार नरेश पाल ने बताया कि सूचना प्राप्त होते ही विभागीय टीम को मौके पर भेज दिया गया। जेसीबी मशीन की सहायता से ग्रामीणों के सहयोग से टूटी हुई पटरी को बंद करने और कटाव रोकने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जल्द ही मरम्मत कार्य पूरा कर मार्ग को दोबारा सुचारु कर दिया जाएगा, ताकि किसानों और राहगीरों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
घटना के बाद क्षेत्र के किसानों ने मांग की है कि नहर की कमजोर पटरी का स्थायी समाधान कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और किसानों की फसलें व ग्रामीणों का आवागमन सुरक्षित रह सके।