
गरीबों पर टूटी बारिश की मार, आशियाना ढहा तो छलक पड़े आंसू
* आसमान से बरसी आफत, पलभर में उजड़ गई दो गरीबों की दुनिया; मलबे में दबी ज़िंदगी, विधवा की दर्दभरी पुकार”अब सिर छुपाने को छत भी नहीं बची”
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। सोमवार को हुई मूसलाधार बारिश ने गरीब परिवारों की ज़िंदगी पर ऐसा कहर बरपाया कि वर्षों की मेहनत से बने दो कच्चे मकान कुछ ही पलों में मिट्टी के ढेर में बदल गए। मोहल्ला इदरीश बेग स्थित बिहार कॉलोनी में बारिश ने ऐसा तांडव मचाया कि लोगों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। देखते ही देखते घरों की दीवारें भरभराकर गिर गईं और परिवार का सामान मलबे में दफन हो गया।
हादसा खलील के पुत्र छोटू और सद्दाम के मकानों में हुआ। उस समय छोटू की 55 वर्षीय मां साइना घर के अंदर मौजूद थीं। मकान गिरते ही वह मलबे में दब गईं। पड़ोसियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़कर उन्हें बाहर निकाला। गनीमत रही कि उनकी जान बच गई, लेकिन घर पूरी तरह तबाह हो गया।
साइना ने रुंधे गले से बताया कि उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है। वह ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर किसी तरह बच्चों का पेट पाल रही थीं। अब बारिश ने उनके सिर से छत भी छीन ली। घर का राशन, कपड़े, बर्तन, बिस्तर और रोजमर्रा का सामान सब कुछ मलबे में दबकर बर्बाद हो गया। परिवार के सामने अब दो वक्त की रोटी और रहने की जगह का भी संकट खड़ा हो गया है।
हादसे के बाद पीड़ित परिवार ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता, रहने के लिए सुरक्षित आवास और उचित मुआवजे की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर सरकारी मदद नहीं मिली तो यह परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर होगा।