
वरिष्ठ भाजपा नेता के निधन से क्षेत्र में शोक, अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
* हिंदू-मुस्लिम एकता, जनसेवा और सादगी की मिसाल थे नरेश चंद्र सैनी, अंतिम विदाई में उमड़ा हजारों लोगों का जनसैलाब
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। कस्बे के मोहल्ला खेल निवासी भाजपा के वरिष्ठ नेता, समाजसेवी एवं नगर की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले नरेश चंद्र सैनी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे कांधला नगर सहित आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही उनके निधन का समाचार लोगों तक पहुंचा, उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। अंतिम दर्शन के लिए सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी।
नरेश चंद्र सैनी का नाम कांधला की राजनीति में किसी परिचय का मोहताज नहीं था। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा जनसेवा और समाज को जोड़ने के कार्य में समर्पित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से लंबे समय तक जुड़े रहने के बावजूद उन्होंने कभी राजनीति को धर्म और जाति के चश्मे से नहीं देखा। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की थी, जो हर वर्ग, हर समुदाय और हर व्यक्ति के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे।
नगर के लोगों का कहना है कि नरेश सैनी उन चुनिंदा नेताओं में शामिल थे, जो चुनाव के समय ही नहीं बल्कि पूरे वर्ष जनता के बीच रहते थे। किसी के घर दुख हो या सुख, सामाजिक कार्यक्रम हो या किसी गरीब की समस्या, नरेश सैनी हर मौके पर सबसे आगे दिखाई देते थे। यही वजह रही कि उनके निधन की खबर सुनकर हर वर्ग के लोगों की आंखें नम हो गईं।
वर्ष 2001 से लेकर अब तक उन्होंने कई बार नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा। कई चुनावों में उन्हें बेहद कम मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी जनता का साथ नहीं छोड़ा। हार और जीत को लोकतंत्र का हिस्सा मानते हुए उन्होंने लगातार जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष किया। उनके समर्थकों का कहना है कि चुनावी परिणाम चाहे जो भी रहे हों, लेकिन जनता के दिलों में नरेश सैनी हमेशा विजेता रहे।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना था। उन्होंने हमेशा समाज को जोड़ने का कार्य किया और भाईचारे की मिसाल पेश की। उनके निधन पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने एक साथ पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो उनके व्यक्तित्व और लोकप्रियता को दर्शाता है।
मंगलवार को आयोजित अंतिम संस्कार में क्षेत्र के अनेक राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, व्यापारियों, युवाओं और बुजुर्गों सहित भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया। अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ यह बता रही थी कि नरेश सैनी केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में बसने वाले जननेता थे। श्मशान घाट पर हर आंख नम थी और वातावरण गमगीन बना हुआ था।
नगरवासियों का कहना है कि नरेश चंद्र सैनी का निधन केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि कांधला की राजनीति, सामाजिक एकता और जनसेवा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत है। उन्होंने अपने व्यवहार, संघर्ष और सेवा भाव से जो पहचान बनाई, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।