
मंदिर व सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा बरकरार, आदेशों के बावजूद कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में आक्रोश
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला, संवाददाता। विकास खंड क्षेत्र के ग्राम मीमला में शिव व दुर्गा मंदिर तथा सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला वर्षों से विवादों में घिरा हुआ है। कई अदालती आदेशों और उच्च स्तरीय शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है।
ग्राम मीमला निवासी परीक्षत पुत्र संसार सिंह ने जिलाधिकारी शामली को प्रेषित शिकायत पत्र में बताया कि गांव के खसरा संख्या 479, कुल रकबा 0.6070 हेक्टेयर भूमि, जो कि शिव मंदिर, दुर्गा मंदिर और सार्वजनिक मार्ग के रूप में दर्ज है, उस पर कुछ लोगों ने अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पूर्व तहसीलदार ने 7 जनवरी 2005 को अवैध कब्जाधारी धनपाल के खिलाफ 1052 रुपये का जुर्माना और बेदखली के आदेश जारी किए थे। इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रिट याचिका संख्या 31378/2005 में 4 मार्च 2014 को अंतरिम आदेश को यथावत रखते हुए बेदखली के आदेशों को बरकरार रखा।
इसके अतिरिक्त 22 अप्रैल 2022 को सहारनपुर मंडलायुक्त ने भी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश जारी किए थे। वहीं 1 फरवरी 2025 को उत्तर प्रदेश विधान परिषद में एमएलसी प्रभु दयाल नारायण द्वारा इस मामले को उठाते हुए कब्जा हटवाने की मांग की गई थी। इसके बावजूद अब तक न तो कब्जा हटाया गया और न ही निर्माण ध्वस्त कराया गया।
परीक्षत का आरोप है कि शिकायत करने के बाद से कब्जाधारी झगड़ालू रवैया अपनाए हुए हैं, जिससे उन्हें और उनके परिवार को जान-माल का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से सार्वजनिक संपत्ति को कब्जामुक्त कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते मंदिर और सार्वजनिक मार्ग की भूमि आज भी कब्जे में है। अब ग्रामीणों को उच्च स्तरीय हस्तक्षेप का इंतजार है, ताकि मंदिर की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल कर सार्वजनिक रास्ते को भी मुक्त कराया जा सके।