
एडीजी दरबार पहुंचा कांधला का मामला, पुलिस पर फर्जी कार्रवाई के गंभीर आरोप
* “शिकायत की तो भाई-भतीजे पर दर्ज करा दिया मुकदमा” सीसीटीवी और CDR जांच की मांग से मचा हड़कंप
सादिक सिद्दीक़ी,
कांधला। कस्बे के मोहल्ला खेल वार्ड संख्या-09 निवासी कपड़ा व्यापारी आरिफ पुत्र लतीफ ने थाना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) मेरठ से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस ने पहले उन्हें थाने में बैठाकर मारपीट की और फिर 16 हजार रुपये की अवैध वसूली की। इतना ही नहीं, उच्चाधिकारियों से शिकायत करने के बाद उनके परिवार को फर्जी मुकदमे में फंसाने का भी आरोप लगाया गया है।
आरिफ ने एडीजी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 29 मई को पड़ोस में हुए विवाद के बाद उन्होंने खुद पुलिस को सूचना दी थी, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय पुलिस उन्हें ही थाने ले गई। आरोप है कि थाने में उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई तथा 16 हजार रुपये की कथित अवैध वसूली की गई।पीड़ित का कहना है कि जब यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और 31 मई को उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत की, तो थाना प्रभारी निरीक्षक नाराज हो गए। आरोप है कि पुलिस ने गवाहों पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में बयान दर्ज कराए।आरिफ के अनुसार, 2 जून को उन्होंने मेरठ पहुंचकर एडीजी कार्यालय में पूरे मामले की शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद थाना प्रभारी ने दूसरे पक्ष के साथ मिलकर उनके भाई अहसान और भतीजे अदनान के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 216/26 धारा 115(2), 352, 351(2) और 333 के तहत दर्ज करा दिया।
पीड़ित ने दर्ज मुकदमे को पूरी तरह झूठा बताते हुए दावा किया कि घटना के समय उनका भाई अहसान कांधला में अपने एक मित्र के घर मौजूद था, जबकि भतीजा अदनान दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में अपनी कपड़े की दुकान बंद कर रहा था। उन्होंने कहा कि दोनों के वहां मौजूद होने के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं।
आरिफ ने यह भी सवाल उठाया कि यदि 29 मई को उनके परिवार द्वारा दूसरे पक्ष के घर में घुसकर मारपीट की गई थी, तो तत्काल पुलिस या डायल-112 पर शिकायत क्यों नहीं की गई।
पीड़ित ने एडीजी मेरठ से मांग की है कि मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन की सीडीआर को शामिल किया जाए। साथ ही उनके भाई और भतीजे के खिलाफ दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाए तथा कथित अवैध वसूली और मारपीट के मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।