
गोद में लाश, पैरों में पानी गढ़ी दौलत का दर्दनाक सच सोशल मीडिया पर वायरल: पानी में डूबी शव यात्रा ने उठाए सवाल
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। विकास खंड के गांव गढ़ी दौलत की हिंदू नट बस्ती में जलभराव ने ऐसा खौफनाक मंजर पैदा कर दिया है, जिसने इंसानियत, व्यवस्था और जिम्मेदारों की संवेदनहीनता तीनों को एक साथ कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहां तीन फीट तक भरे गंदे पानी के बीच एक 4 माह के मासूम की मौत हो गई, लेकिन इससे भी ज्यादा दिल दहला देने वाली तस्वीर तब सामने आई जब परिजनों को उस मासूम की लाश गोद में उठाकर घुटनों तक पानी में पैदल शमशान घाट तक जाना पड़ा। इस दर्दनाक घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इलाके में हड़कंप मच गया है। हर कोई एक ही सवाल पूछ रहा है क्या यही है व्यवस्था है जानकारी के मुताबिक, संजय के 4 महीने के मासूम की मौत संक्रामक बीमारी से हुई। लेकिन ग्रामीणों का साफ कहना है कि असली वजह बीमारी नहीं, बल्कि पिछले 2 साल से बस्ती में फैला जलभराव है। घरों के अंदर तक घुसा गंदा पानी, सड़ांध और मच्छरों का आतंक यहां के लोगों की जिंदगी को नरक बना चुका है।हालात इतने बदतर हैं कि बस्ती के रास्ते तालाब बन चुके हैं। ऐसे में जब मासूम की मौत हुई, तो परिवार के पास कोई विकल्प नहीं था न एंबुलेंस पहुंच सकी, न ही कोई पक्का रास्ता। मजबूरी में परिजनों को बच्चे का शव गोद में उठाकर पानी से भरे रास्ते में पैदल चलना पड़ा। हर कदम के साथ आंखों में आंसू और दिल में दर्द था।ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 2 साल से पानी निकासी का रास्ता बंद पड़ा है, लेकिन जिम्मेदारों ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया। तहसील दिवस से लेकर अधिकारियों के चक्कर काटे गए, शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार सिर्फ खानापूर्ति हुई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।गांव वालों ने ग्राम प्रधान और उनके पति राशीद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके रसूख के कारण जानबूझकर पानी निकासी का रास्ता नहीं खोला जा रहा। “अगर रास्ता खुल जाता, तो आज ये नौबत नहीं आती,” ग्रामीणों का कहना है।
वायरल वीडियो में जो दृश्य सामने आया है, वह किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोर देने के लिए काफी है चारों तरफ गंदा पानी, उसमें डूबे रास्ते, रोते-बिलखते परिजन, और गोद में मासूम की निर्जीव देह… ये सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर लगा बड़ा सवालिया निशान है। इस घटना के बाद बस्ती के 50 से अधिक परिवारों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अब उनका सब्र टूट चुका है। रविवार को चंद्रपाल, धर्मपाल, राजकुमार, संजय, सोनू, करण, पप्पू, सोहनवीर समेत दर्जनों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन करते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की।ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा“जब जिम्मेदार ही आंख मूंद लें, तो मौत दरवाजे पर दस्तक देती है अब यहां जीना मुश्किल हो गया है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो हम सब अपने मकान बेचकर यहां से पलायन करने को मजबूर होंगे।”