
चार दिन में सड़क या बड़ा जुमला सभासद के वायरल दावे पर कस्बे की निगाहें”
* सड़क नहीं बनी तो शहर छोड़ दूंगा सभासद के वायरल बयान से पूरे कस्बे में चर्चा
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सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। मोहल्ला खेल वार्ड नंबर 4 के सभासद विक्रांत डगोरिया का एक बयान इन दिनों पूरे कस्बे में चर्चा और बहस का बड़ा विषय बना हुआ है। करीब आठ दिन पहले पिलखन वाली मस्जिद के पास की जर्जर और लंबे समय से खराब पड़ी सड़क को लेकर उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में सभासद लोगों के बीच काफी जोश में नजर आते हुए यह ऐलान करते दिखाई दिए थे कि 20 मार्च 2026 तक हर हाल में इस सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा।वीडियो में उन्होंने यह भी कहा था कि यदि तय समय सीमा तक सड़क का निर्माण नहीं हो पाया तो वह शहर छोड़ देंगे। सभासद के इस बयान के सामने आते ही कस्बे में हलचल मच गई थी और देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।वायरल वीडियो के बाद से ही कस्बे के बाजारों, चौराहों, और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग इसी बयान को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। कई लोग इसे जनता के प्रति जिम्मेदारी और हिम्मत भरा कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे बड़ा सियासी दावा बताते हुए सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या इतनी कम अवधि में सड़क का निर्माण संभव है।
आज 16 मार्च की तारीख हो चुकी है और सभासद द्वारा दी गई समय सीमा 20 मार्च में अब केवल चार दिन का समय ही बाकी रह गया है। लेकिन फिलहाल मौके पर सड़क निर्माण से जुड़ी कोई बड़ी हलचल दिखाई नहीं दे रही है। न तो निर्माण कार्य के लिए मशीनें नजर आ रही हैं और न ही किसी तेज निर्माण गतिविधि की शुरुआत साफ तौर पर दिखाई दे रही है।ऐसे में कस्बे के लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या सच में चार दिन के भीतर सड़क बनकर तैयार हो पाएगी या फिर यह बयान भी राजनीति के उन दावों में शामिल हो जाएगा जो कुछ दिनों तक चर्चा में रहने के बाद धीरे-धीरे ठंडे पड़ जाते हैं। फिलहाल पूरे कस्बे की निगाहें अब 20 मार्च की तारीख पर टिकी हुई हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि सभासद का दावा हकीकत बनता है या फिर यह मामला केवल एक वायरल बयान बनकर रह जाता है।जब इस पूरे मामले में सभासद विक्रांत डगोरिया से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 20 मार्च तक सड़क निर्माण हर हाल में पूरा करा दिया जाएगा।
अब यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि 20 मार्च 2026 तक सड़क निर्माण पूरा होता है या नहीं। इसके बाद ही साफ होगा कि सभासद का यह दावा हकीकत साबित होता है या फिर यह बयान भी कस्बे की चर्चाओं में शामिल एक बड़ा जुमला बनकर रह जाता है।