
राम-भरत मिलन प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, भक्ति-रस में डूबा पूरा पंडाल
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला क्षेत्र के कस्बा एलम के आजाद नगर में चल रही श्री राम कथा के छठवें दिन गुरुवार को कथा व्यास आचार्य निखिल जी महाराज ने राम-भरत मिलन के ऐतिहासिक प्रसंग का ऐसा हृदयस्पर्शी और मार्मिक वर्णन किया कि पूरा पंडाल भक्ति-रस में डूब गया। कथा सुनते-सुनते सैकड़ों श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं और कई भक्त भावुकता पर काबू नहीं रख पाए।
कथा व्यास आचार्य निखिल जी महाराज ने कहा कि यह प्रसंग केवल दो भाइयों का मिलन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का सर्वोच्च आध्यात्मिक संदेश है, जो त्याग, समर्पण, निष्काम प्रेम और मर्यादा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि जब भगवान श्री राम वनवास चले गए तो भरत जी ने माता कैकेयी द्वारा दिए गए राजसिंहासन को ठुकरा दिया। भरत जी ने भगवान राम की खड़ाऊं को सिंहासन पर विराजमान कर यह संदेश दिया कि सच्चा राजा वही है और वे स्वयं उनके सेवक हैं।
प्रवचन के दौरान आचार्य निखिल जी महाराज ने कहा कि आज के समय में जब स्वार्थ, अहंकार और सत्ता-लोलुपता रिश्तों को कमजोर कर रही है, तब राम-भरत मिलन का प्रसंग हमें सिखाता है कि सच्चा धन राज-पाट में नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों और अपनों के प्रति निष्काम समर्पण में होता है। भरत जी का चरित्र यह दर्शाता है कि आत्मिक प्रेम के सामने सांसारिक ऐश्वर्य कितना छोटा है।
जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, पंडाल में भक्ति और भावनाओं का अद्भुत माहौल बन गया। भरत के त्याग और राम के वात्सल्य का वर्णन सुन श्रद्धालुओं की आँखों से अश्रुधारा बहने लगी। अंत में पूरा पंडाल “जय श्री राम” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु, संत-महात्मा और भक्तगण उपस्थित रहे। कथा का समापन शाम को विशाल आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। राम कथा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि समाज को त्याग, अध्यात्म और सच्चे रिश्तों का संदेश देने वाला प्रेरणादायक कार्यक्रम साबित हो रही है।