मुसाफिर मस्जिद में तरावीह के दौरान मुकम्मल हुआ कुरआन, कारी साहबों को इनाम देकर किया सम्मान

 

सादिक सिद्दीक़ी

कांधला कस्बे के दिल्ली बस स्टैंड स्थित मुसाफिर मस्जिद में रमज़ान के मुकद्दस महीने में तरावीह की नमाज़ के दौरान 24वें रोजे की रात (25वीं शब) कुरआन पाक मुकम्मल किया गया। ख़त्म-ए-क़ुरआन के इस मुबारक मौके पर मस्जिद में अकीदतमंदों की अच्छी खासी मौजूदगी रही और पूरे माहौल में इबादत, अकीदत और खुशियों की रौनक देखने को मिली।

तरावीह की नमाज़ में पूरे रमज़ान भर कुरआन पाक सुनाने की जिम्मेदारी कारी फुरकान ने निभाई। उन्होंने खूबसूरत अंदाज़ में कुरआन पाक की तिलावत सुनाई, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में नमाज़ी रोजाना मस्जिद पहुंचते रहे। वहीं तरावीह में कुरआन सुनने की जिम्मेदारी कारी मुस्तकीम ने निभाई और पूरे रमज़ान नमाज़ियों के साथ इबादत में शरीक रहे।

ख़त्म-ए-क़ुरआन के इस मुबारक मौके पर मस्जिद कमेटी और नमाज़ियों की ओर से दोनों कारी साहब का सम्मान किया गया। इस दौरान कारी फुरकान को 11 हजार रुपये और कारी मुस्तकीम को भी 11 हजार रुपये इनाम के तौर पर भेंट किए गए।

मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि रमज़ान के पूरे महीने तरावीह में कुरआन पाक सुनाना और सुनना दोनों ही बड़ी सवाब की बात है। ऐसे में कुरआन की खिदमत करने वालों का सम्मान करना समाज के लिए एक अच्छी मिसाल है।

कारी मुस्तकीम ने इस मौके पर कहा कि रमज़ान का महीना अल्लाह की खास रहमतों और बरकतों का महीना है। इस महीने में कुरआन पाक की तिलावत और इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि वे रमज़ान के इस मुकद्दस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें और एक-दूसरे के साथ मोहब्बत व भाईचारा कायम रखें।

ख़त्म-ए-क़ुरआन के बाद मस्जिद में खास दुआ कराई गई, जिसमें देश में अमन-चैन, तरक्की और समाज में भाईचारे के लिए दुआ मांगी गई। नमाज़ियों ने अल्लाह से दुआ की कि वह सभी रोजेदारों की इबादतों को कबूल फरमाए और पूरे समाज में शांति और खुशहाली कायम रखे।

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