“पश्चिमांचल विकास परिषद का गठन उपेक्षित क्षेत्र के विकास का संकल्प

सादिक सिद्दीक़ी

कांधला। पश्चिम उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरती पर सोमवार को “पश्चिमांचल विकास परिषद” का गठन किया गया। वर्षों से उपेक्षा झेल रहे पश्चिमांचल क्षेत्र को उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, न्याय, बड़े उद्योग, खेल सुविधाएं और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकार दिलाने के उद्देश्य से यह परिषद बनाई गई है। इस मौके पर परिषद के अध्यक्ष नितिन स्वामी ने कहा, “हमें अपनी संस्कृति को बचाना होगा, अन्यथा हमारी पहचान विलुप्त हो जाएगी। ‘रागिनी’ जैसी लोकधरोहर को पुनः आगे बढ़ाना होगा। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, संस्कृति, रोजगार, पर्यावरण और खेल के क्षेत्र में हो रहे भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष करना होगा।”परिषद क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय, रोजगार, खेल, पर्यावरण और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ पश्चिमांचल के युवाओं, किसानों, मजदूरों और महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और एक निष्पक्ष, पारदर्शी व जनसरोकार आधारित आंदोलन खड़ा करने का काम करेगी।

ध्वज व संकल्प

कार्यक्रम में परिषद का ध्वज भी प्रस्तुत किया गया, जिसका भूरा रंग (Brown) पश्चिमांचल की पावन मिट्टी, परिश्रम और जड़ों से जुड़े रहने के संकल्प का प्रतीक है। पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने शपथ ली कि वे निस्वार्थ भाव से क्षेत्र की सेवा करेंगे, पश्चिमांचल के हक़ की आवाज़ बुलंद करेंगे और विकास को जनांदोलन का रूप देंगे।

परिषद का नारा

“पहला प्रयास – पश्चिमांचल का विकास”

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