सरस्वती विद्या मंदिर में सात दिवसीय रंग पाठशाला का शुभारंभ, छात्र सीख रहे हैं अभिनय के गुर!
भारतेंदु नाट्य अकादमी के मार्गदर्शन में निःशुल्क प्रशिक्षण, प्रमाणपत्र मिलेगा!
कैराना। लाला नरसिंह दास सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में 18 जून से सात दिवसीय रंग पाठशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें छात्र-छात्राओं को रंगमंच की बुनियादी विधाएँ, आंगिक-वाचिक अभिनय और संवाद अदायगी जैसे कौशल सिखाए जा रहे हैं। यह कार्यशाला उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के निर्देश पर भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ द्वारा संचालित की जा रही है, जिसमें प्रशिक्षक मयंक प्रताप छात्रों को निःशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशिक्षण शिविर प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक चलता है, जहाँ छात्र नाट्य कला के माध्यम से अपने व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास को बढ़ाने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं। मयंक प्रताप के अनुसार, इसका उद्देश्य छात्रों के “आंतरिक हुनर को विकसित करना” है, साथ ही उन्हें जीवन में सफलता के लिए शैक्षणिक योग्यता के अलावा कौशल निर्माण के महत्व से अवगत कराना है।
कार्यशाला के समापन पर प्रदेश सरकार द्वारा प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे, जो छात्रों के प्रशिक्षण को औपचारिक मान्यता प्रदान करेंगे। प्रशिक्षक ने जोर देकर कहा कि अभिनय कौशल न केवल रचनात्मकता बढ़ाता है बल्कि समूह में कार्य करने की क्षमता और सामाजिक संवेदनशीलता भी विकसित करता है।
इसी विद्यालय में हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगाभ्यास और वृक्षारोपण कार्यक्रम जैसे सह-पाठयक्रम गतिविधियाँ आयोजित की गई थीं, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है 27। भारतेंदु नाट्य अकादमी राज्य भर में ऐसी कार्यशालाएँ आयोजित कर रही है, जिसका लक्ष्य युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रखना है।
कार्यशाला की प्रमुख विशेषताएँ:
- आयोजक भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ (उप्र संस्कृति विभाग के निर्देश पर)
- प्रशिक्षक मयंक प्रताप
- अवधि 18 जून से 24 जून 2025 (7 दिवसीय)
- समय प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से 12:00 बजे तक
- प्रमाणपत्र उप्र सरकार द्वारा समापन पर जारी किए जाएँगे
- उद्देश्य: छात्रों में रंगमंच कौशल विकसित करना, व्यक्तित्व निखारना और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना
यह आयोजन विद्यालय की सक्रिय शैक्षणिक नीति को रेखांकित करता है, जहाँ पाठ्यक्रम के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों को समान महत्व दिया जाता है। भविष्य में भी ऐसे प्रयासों के माध्यम से छात्रों को राष्ट्रीय संस्कृति से जोड़ने की योजना है।