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मौत की छाया में जीवन की जीत: सीट 11A पर बैठा यात्री बना चमत्कारी सर्वाइवर!

242 लोगों की जान लेने वाली एयर इंडिया दुर्घटना में ब्रिटिश नागरिक रमेश विश्वासकुमार की रहस्यमयी ज़िन्दगी! 

जब मैं उठा, मेरे चारों तरफ सिर्फ लाशें थीं… डर लगा, मैं भागने लगा- रमेश विश्वासकुमार, एकमात्र जीवित बचा यात्री!

 

अहमदाबाद, 12 जून।: एक विमान दुर्घटना जिसने 242 लोगों की सांसें छीन लीं, वहां मौत के बीच से एक जिंदगी का चमत्कारिक बच निकलना आज पूरी दुनिया को हैरान कर रहा है। एयर इंडिया की उड़ान AI171, जो अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही थी, आज दोपहर केवल 625 फीट की ऊंचाई तक पहुंच पाई। विमान के टेकऑफ के महज 30 सेकंड बाद ही भयानक हादसा हो गया और यह शहर के मेघानीनगर इलाके में बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास और कैंटीन से जा टकराया। इस हादसे में विमान में सवार सभी 241 लोगों की मौत हो गई, लेकिन सीट नंबर 11ए पर बैठे रमेश विश्वासकुमार (40) किसी तरह जिंदा बच निकले।

चमत्कार के पीछे का विज्ञान: क्यों बच पाई 11ए की जान?

आपातकालीन निकास का सटीक स्थान: रमेश की सीट विमान के इमरजेंसी एग्जिट के ठीक पीछे थी। एयरोलोपा के विमान सीटिंग मैप के अनुसार, एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर में यह सीट इकोनॉमी क्लास की पहली पंक्ति में है।

कूदने का सही क्षण: रमेश ने विमान के जमीन से टकराने से ठीक पहले इमरजेंसी विंडो से कूदकर अपनी जान बचाई। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया – “टेकऑफ के 30 सेकंड बाद जोरदार धमाका हुआ और विमान नीचे गिरने लगा। सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि समझ ही नहीं आया”।

गंभीर चोटें पर जान बची: रमेश को सीने, आंखों और पैरों में चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल में भर्ती होने से पहले उन्होंने एक वीडियो में कहा – “विमान में विस्फोट हुआ… बाकी सब पीछे अंदर हैं”।

त्रासदी के आंकड़े: जो नहीं बच पाए।

मौतों का भयानक आंकड़ा: अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर जीएस मलिक के अनुसार, विमान में सवार 230 यात्रियों और 12 क्रू मेंबर्स सहित कुल 242 लोगों में से सिर्फ रमेश ही जीवित बचे हैं। अब तक 204 शव बरामद किए जा चुके हैं।

विमान के अंदर और बाहर दोनों तरफ मौत: विमान के डॉक्टर्स हॉस्टल से टकराने के कारण वहां रह रहे कम से कम 5 मेडिकल छात्रों की भी मौत हो गई और 50-60 घायल हुए।

वरिष्ठ नेताओं की मौत: विमान में पूर्व गुजरात मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी सवार थे, जिनकी मौत की पुष्टि हो चुकी है।

राष्ट्रीय शोक और वैश्विक संवेदना

आपातकालीन प्रतिक्रिया: तत्काल प्रभाव से एयर इंडिया ने हेल्पलाइन नंबर (1800 5691 444) जारी किया। टाटा समूह ने मृतकों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजे का ऐलान किया और घायलों के इलाज का खर्च उठाने का वादा किया।

वैश्विक संवेदनाएं: ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने कहा कि वे और क्वीन कैमिला इस “भयानक घटना” से “गहरे स्तब्ध” हैं। ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने दृश्यों को “दिल दहला देने वाला” बताया। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भी संवेदना व्यक्त की।

राहत उड़ानें: एयर इंडिया ने रिश्तेदारों के लिए दिल्ली और मुंबई से दो राहत उड़ानें आयोजित की हैं।

अनुत्तरित सवाल और जांच की दिशा

तकनीकी खामी?: एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लैप्स की गलत सेटिंग, पक्षियों से टक्कर या इंजन फेलियर जैसी तकनीकी खराबी इसका कारण हो सकती है। विमान ने मेडे कॉल दी थी लेकिन उसके बाद उसका संपर्क टूट गया।

ब्लैक बॉक्स की तलाश: भारत का एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ब्लैक बॉक्स की तलाश कर रहा है। यूके के AAIB और अमेरिका के NTSB भी जांच में सहयोग करेंगे।

ड्रीमलाइनर का पहला घातक हादसा: बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर की यह पहली घातक दुर्घटना है, जिससे विमान की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।

“भाग्य कभी-कभी ऐसे चमत्कार दिखाता है जो विज्ञान और तर्क की सीमाओं को चुनौती देते हैं। रमेश का बचना न सिर्फ एक चमत्कार है, बल्कि विमान सुरक्षा में आपातकालीन निकास के महत्व का जीवंत प्रमाण भी।” – एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट का विश्लेषण

इस त्रासदी ने एक बार फिर विमान सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रमेश के बचाव ने आपातकालीन निकास के स्थानों के महत्व को रेखांकित किया है, लेकिन साथ ही यह भी याद दिलाया है कि अभी भी विमान दुर्घटनाओं में बचाव के लिए और कई उपाय किए जाने की जरूरत है। जैसा कि रमेश ने कहा – “सब कुछ इतनी तेजी से हुआ…”, ऐसे में विमान कंपनियों को टेकऑफ और लैंडिंग के महत्वपूर्ण पलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सुदृढ़ करना होगा।

जांच अभी शुरुआती चरण में है और दुनिया भर की एविएशन एजेंसियां इस निष्कर्ष का इंतजार कर रही हैं कि आखिर भारत की यह सबसे भयानक विमान दुर्घटनाएं क्यों हुई। इस बीच, सीट 11ए पर बैठा एक शख्स अपनी जिंदगी की दूसरी पारी पाने के लिए भाग्य का शुक्रिया अदा कर रहा है, जबकि 242 परिवार एक ऐसी त्रासदी का सामना कर रहे हैं जिसका दर्द शायद कभी कम न हो।

 

 

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