सरस्वती विहार स्कूल में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान: छात्राओं को सोशल मीडिया और AI के खतरों से आगाह किया गया!
संस्कार और सुरक्षा पर जोर: सहारनपुर के स्कूल में बेटियों के अधिकारों को लेकर हुई जागरूकता चर्चा!
जिला प्रशासन और स्कूल प्रशासन का संयुक्त प्रयास: बेटियों को सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई नई पहल!

सहारनपुर। महानगर की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था सरस्वती विहार सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को लैंगिक समानता, बालिका सुरक्षा, और डिजिटल दुनिया के खतरों के प्रति संवेदनशील बनाना था। साथ ही, शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी मनीष बंसल के निर्देशन और जिला प्रोबेशन अधिकारी अभिषेक पांडे के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके की गई। इसमें स्कूल प्रबंधक दिनेश सेठी, प्रधानाचार्य राशि पुंडीर, मोटिवेशनल स्पीकर गुलशन नागपाल, और कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक देवेंद्र कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया और AI के खतरे:
वरिष्ठ उपनिरीक्षक देवेंद्र कुमार ने छात्रों को सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने हैल्पलाइन नंबर (112, 1090, 1076, 1098) की जानकारी देते हुए कहा कि दुर्व्यवहार की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयोग से सतर्क रहने को कहा।
संस्कार और शिक्षा का समन्वय:
मोटिवेशनल स्पीकर गुलशन नागपाल ने छात्रों से कहा कि शिक्षा के साथ संस्कार ही जीवन की नींव हैं। माता-पिता का सम्मान करें, भले ही इसके लिए नौकरी छोड़नी पड़े। उन्होंने जीवन में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
बेटियों की सुरक्षा और सशक्तिकरण:
जागरूकता अभियान के समन्वयक सुरेंद्र चौहान ने कहा कि बेटियों को अपनी सुरक्षा और सम्मान के प्रति सजग रहना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपेक्षा जताई कि वे बच्चों के सपनों को पूरा करने में सहयोग दें।
‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान 2015 से देशभर में चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लिंगानुपात में सुधार, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना, और महिला सशक्तिकरण को मजबूती प्रदान करना है। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इसके तहत सुभाष योजना, लक्ष्मी योजना, और कन्या विद्या धन जैसी पहलों से बेटियों को वित्तीय सहायता मिल रही है।
स्कूल की प्रधानाचार्य राशि पुंडीर ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल बच्चों को शिक्षित करते हैं, बल्कि उन्हें संस्कारवान नागरिक बनाने में भी मदद करते हैं। उन्होंने भविष्य में और अधिक जागरूकता गतिविधियों के आयोजन का संकल्प व्यक्त किया।
यह कार्यक्रम न केवल बेटियों के अधिकारों को मजबूती देता है, बल्कि डिजिटल युग में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकारी योजनाओं और स्थानीय प्रयासों के समन्वय से समाज में लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है।