प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में लापरवाही: कैराना ब्लॉक में अधूरा सर्वे, लाभार्थियों के सपने अधर में
ग्राम पंचायत सचिवों की ढिलाई ने ठप किया आवास योजना का सर्वे, विकास खंड अधिकारी भी मूकदर्शक
31 मार्च की डेडलाइन गुजरने के बाद भी लटका सर्वे, अब तारीख बढ़ाने की उम्मीद में अधिकारी
कैराना (शामली)। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (PMAY-G) के तहत गरीबों को पक्के मकान का सपना पूरा करने की कवायद एक बार फिर अधर में लटक गई है। कैराना विकास खंड के 42 ग्राम पंचायतों में आवेदन करने वाले लाभार्थियों का सर्वे और जांच प्रक्रिया ग्राम सचिवों की लापरवाही के कारण अधूरी पड़ी है। निर्धारित समय सीमा (31 मार्च) समाप्त हो चुकी है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट जमा करने में हुई देरी से योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है।
योजना का उद्देश्य और प्रक्रिया:
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित इस योजना का मकसद ग्रामीण इलाकों में झोपड़ियों, कच्चे घरों या खुले आसमान तले रहने वाले परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। इसके लिए 31 मार्च तक आवेदन आमंत्रित किए गए थे। ग्राम पंचायत सचिवों को आवेदनों की प्रारंभिक जांच करके पात्र लाभार्थियों की सूची तैयार करनी थी, लेकिन अधिकांश पंचायतों में यह काम पूरा नहीं हो सका।
लापरवाही के आरोप:
सूत्रों के अनुसार, कई ग्राम सचिवों ने आवेदनों की गहन जांच और फर्जीवाड़ा रोकने के बजाय लापरवाही बरती। इसकी वजह से सैकड़ों आवेदन अभी तक सत्यापित नहीं हो पाए हैं। विकास खंड कार्यालय के अधिकारियों ने भी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई और समयसीमा के बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
अधिकारियों का बयान:
विकास खंड अधिकारी (बीडीओ) उमाकांत मुद्गल ने बताया कि आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। उन्होंने कहा, कि ग्राम सचिवों को निर्देश दिए गए थे कि वे आवेदनों की जल्द से जल्द जांच करें, लेकिन कुछ पंचायतों में काम धीमा चल रहा है। हम इस मुद्दे को हल करने का प्रयास कर रहे हैं।
लाभार्थियों की परेशानी:
इस देरी का सीधा असर गरीबों पर पड़ रहा है। कई लाभार्थियों ने शिकायत की कि उनके आवेदन महीनों से लंबित हैं, जबकि मानसून आने वाला है और कच्चे घरों में रहने की स्थिति और भी दयनीय हो जाएगी।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को गति देने के लिए अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिवों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। देरी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी उठने लगी है, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए।