
दशलक्षण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म की आराधना
* इंद्रिय संयम और इच्छाओं के त्याग को बताया तप का सार, भजनों व आध्यात्मिक नाटिका से भक्तिमय हुआ जैन मंदिर परिसर
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला, नगर के मोहल्ला सरावज्ञान स्थित श्री 1008 भगवान नेमिनाथ सकल दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम तप धर्म की आराधना कर धर्मलाभ लिया। इस दौरान मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक गतिविधियों का दौर चलता रहा। अभिषेक, शांतिधारा, पूजन-अर्चना एवं धार्मिक प्रवचनों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। धार्मिक कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य एवं विद्वान अवनीश जैन शास्त्री, सांगानेर के निर्देशन में संपन्न हुए।धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उत्तम तप धर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि इच्छाओं का क्षय और इंद्रियों पर संयम ही तप का वास्तविक स्वरूप है। तप केवल उपवास रखने या शरीर को कष्ट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि मन में उठने वाली सांसारिक इच्छाओं, विकारों और मोह-माया पर नियंत्रण प्राप्त करना भी तप की साधना का महत्वपूर्ण अंग है।
जैन दर्शन के अनुसार तप के माध्यम से आत्मा की शुद्धि तथा संचित कर्मों की निर्जरा का मार्ग प्रशस्त होता है। जिस प्रकार अग्नि में तपने के बाद सोना और अधिक निखरकर शुद्ध होता है, उसी प्रकार तप की साधना से आत्मा भी अपने शुद्ध स्वरूप की ओर अग्रसर होती है। जैन धर्म में तप को बाह्य और आभ्यंतर दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है तथा इसके कुल 12 प्रकार बताए गए हैं।
*भजनों से गूंजा मंदिर, नाटिका ने मोहा मन*
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शाम के समय जैन अतिथि भवन में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वासुदेव एंड पार्टी द्वारा भगवान नेमिनाथ के जीवन एवं महिमा से जुड़े भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। मधुर भजनों की धुन पर श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
कार्यक्रम के दौरान जैन समाज के बच्चों ने भगवान नेमिनाथ के जीवन से संबंधित आध्यात्मिक नाटिका प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। छोटे-छोटे बच्चों द्वारा प्रस्तुत नाटिका में धर्म, संयम और त्याग का संदेश दिया गया। बच्चों के अभिनय और प्रस्तुति को देखकर श्रद्धालुओं ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। नाटिका का संचालन भी बच्चों द्वारा ही किया गया।
धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। मंदिर परिसर में देर तक धार्मिक माहौल बना रहा। समाज के लोगों ने दशलक्षण पर्व के महत्व पर चर्चा करते हुए पर्व के दौरान अधिक से अधिक धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता करने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में नत्थूमल जैन, कुलदीप जैन, दीपक जैन, नरेंद्र जैन, चूकड़ात प्रवक्ता गुणपाल जैन, प्रवीण जैन, संजीव जैन, प्रशांत जैन, ऋषभ जैन, आकाश जैन, संयम जैन, लक्ष्य जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे। दशलक्षण महापर्व के आगामी दिनों में भी मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।