
वेतन की मांग पर कर्मचारियों का अनशन, अधिकारी पहुंचे तो जूस पिलाकर तुड़वाया!…
सादिक सिद्दीक़ी
कांधला बकाया वेतन को लेकर विद्युत संविदा कर्मचारियों का गुस्सा आखिरकार भूख हड़ताल तक पहुंच गया। खंद्रावली बिजलीघर पर वेतन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों ने साफ कर दिया था कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। कर्मचारियों की नाराजगी के बीच बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत के बाद भूख हड़ताल समाप्त कराई।खंद्रावली बिजलीघर पर वेतन को लेकर कर्मचारियों के तेवर लगातार तल्ख होते जा रहे थे। साथी कर्मचारी अमन चौहान को वेतन नहीं मिलने से नाराज संविदा कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की। कर्मचारियों का कहना था कि वेतन की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों के सामने गुहार लगाई गई, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका। आखिरकार कर्मचारियों ने भूख हड़ताल का रास्ता अपना लिया।भूख हड़ताल की सूचना मिलने पर खंड कांधला सेकंड डिवीजन के उपखंड अधिकारी राकेश कुमार आर्य बिजलीघर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत कर्मचारियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना। अधिकारी ने वेतन संबंधी समस्या का समाधान कराने का भरोसा दिया, जिसके बाद कर्मचारियों का आंदोलन फिलहाल थम गया।
उपखंड अधिकारी ने अपनी जिम्मेदारी पर कर्मचारियों को जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई। अधिकारियों के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया, लेकिन वेतन की समस्या को लेकर उनकी नाराजगी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।संविदा कर्मचारी संघ के कार्यकर्ता रामू चौहान ने बताया कि साथी अमन चौहान को वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू किया था। कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके चलते भूख हड़ताल करनी पड़ी। उपखंड अधिकारी के आश्वासन पर फिलहाल हड़ताल समाप्त कर दी गई है।रामू चौहान ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में वेतन को लेकर दोबारा परेशानी हुई या समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कर्मचारी संगठन फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।अब सवाल यह है कि अधिकारियों का आश्वासन कर्मचारियों के खाते तक वेतन पहुंचाएगा या फिर वेतन की मांग को लेकर बिजलीघर पर दोबारा आंदोलन की चिंगारी भड़केगी? फिलहाल जूस के साथ भूख हड़ताल तो टूट गई, लेकिन कर्मचारियों की नजरें अब वेतन भुगतान पर टिकी हैं।