बर्फ, तूफान और चुनौतियों को हराकर शंकर शर्मा ने छू ली नई बुलंदी

 

सादिक सिद्दीक़ी

 

कांधला। क्षेत्र के गांव एलम का नाम एक बार फिर पूरे प्रदेश में गर्व से लिया जा रहा है। गांव के होनहार पर्वतारोही शंकर शर्मा ने हिमाचल प्रदेश की 6111 मीटर ऊंची माउंट यूनाम चोटी को सफलतापूर्वक फतह कर वहां तिरंगा लहराकर देश और क्षेत्र का मान बढ़ाया है। बर्फीली हवाओं, कठिन रास्तों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को मात देकर शंकर ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे दुनिया की सबसे ऊंची चोटियां भी झुक जाती हैं।

 

शंकर शर्मा ने अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को गांव के शहीद एयरफोर्स जवान गौतम की पावन स्मृति को समर्पित किया। उनकी इस भावुक श्रद्धांजलि ने क्षेत्रवासियों का दिल जीत लिया। जैसे ही उनकी सफलता की खबर गांव पहुंची, परिवार, मित्रों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया।

 

शंकर शर्मा ने वर्ष 2019 में पर्वतारोहण की शुरुआत की। उन्होंने दार्जिलिंग स्थित हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स पूरा किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने लगातार कठिन पर्वतीय अभियानों में हिस्सा लिया और सफलता की नई-नई ऊंचाइयों को छूना शुरू कर दिया। इसी वर्ष उन्होंने करीब 5029 मीटर ऊंची माउंट रेनाक चोटी पर विजय हासिल की। इसके बाद उनका पर्वतारोहण का सफर लगातार आगे बढ़ता गया।

 

वर्ष 2025 में शंकर शर्मा 5364 मीटर ऊंचे एवरेस्ट बेस कैंप तक पहुंचे। इसके साथ ही उन्होंने 5545 मीटर ऊंचे काला पत्थर तक भी सफल चढ़ाई की। इन उपलब्धियों के बाद अब 6111 मीटर ऊंची माउंट यूनाम चोटी पर तिरंगा फहराकर उन्होंने अपने पर्वतारोहण जीवन में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।

 

शंकर शर्मा ने बताया कि माउंट यूनाम की चढ़ाई बेहद चुनौतीपूर्ण रही। बर्फीले रास्ते, तेज हवाएं और ऑक्सीजन की कमी जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लगातार अभ्यास, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों के दम पर उन्होंने यह अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को गांव के शहीद एयरफोर्स जवान गौतम को समर्पित करते हुए कहा कि उनका सपना आने वाले समय में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

 

शंकर शर्मा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल बना दिया है। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने उनकी सफलता पर खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी। उनका संघर्ष, समर्पण और बुलंद हौसला आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। एलम गांव का यह बेटा अपनी मेहनत और साहस के दम पर यह साबित कर चुका है कि सपने बड़े हों और इरादे मजबूत, तो दुनिया की कोई भी चोटी फतह की जा सकती है।

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