
साहब, अब बच्चों को कहाँ ले जाऊँ?” कच्चा मकान ढहा, बेघर हुआ परिवार
सादिक सिद्दीकी
कांधला। लगातार बरस रही बारिश ने एक गरीब मजदूर के परिवार की खुशियां ही नहीं, बल्कि सिर से छत भी छीन ली। कस्बे के मोहल्ला बिजलीघर नई बस्ती देहात निवासी जाहिर पुत्र हनीफ का कच्चा मकान तेज बारिश के बीच अचानक भरभराकर जमींदोज हो गया। कुछ ही पलों में घर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। गनीमत रही कि परिवार के सभी सदस्य जाग रहे थे और समय रहते बाहर निकल आए, वरना यह हादसा कई मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ सकता था।
छत गिरते ही वर्षों की मेहनत से जुटाई गई पूरी गृहस्थी मलबे में दब गई। बर्तन, कपड़े, बिस्तर, राशन, बच्चों का सामान और जरूरी दस्तावेज तक मिट्टी में दब गए। एक गरीब मजदूर की जिंदगी भर की कमाई कुछ ही सेकंड में बर्बाद हो गई। अब हालात ऐसे हैं कि परिवार के पास न रहने को घर बचा है और न ही सिर छिपाने की सुरक्षित जगह।
पीड़ित जाहिर ने बताया कि वह रोज मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह अपने पांच बच्चों का पेट पालता है। पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार पर बारिश ने ऐसी मार मारी कि अब दो वक्त की रोटी और रात गुजारने की जगह दोनों संकट बन गए हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।
हादसे की खबर मिलते ही मोहल्ले के लोग मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने में मदद की। लोगों ने प्रशासन से तत्काल राहत, आर्थिक सहायता और रहने की व्यवस्था कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि समय रहते मदद नहीं मिली तो यह परिवार बारिश और बदहाली के बीच जिंदगी गुजारने को मजबूर रहेगा।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा, राहत सामग्री तथा प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य सरकारी योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने की मांग की है। अब सवाल यह है कि क्या सरकारी राहत इस बेबस परिवार तक समय पर पहुंचेगी, या फिर गरीब की पुकार कागजों में ही दबकर रह जाएगी?