बिना नक्शा पास कराए निर्माण पर एमडीए की कार्रवाई, परिसर सील

 

नगरपालिका के सामने खसरा नंबर 1834 की जमीन पर चल रहा था निर्माण, हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने का भी दावा

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सादिक सिद्दीक़ी

कांधला। नगर पालिका परिषद कांधला कार्यालय के सामने खसरा नंबर 1834 की जमीन पर बिना स्वीकृत नक्शे के कराए जा रहे निर्माण के मामले में मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण (एमडीए) की टीम ने कार्रवाई करते हुए निर्माण स्थल को सील कर दिया। एमडीए की कार्रवाई से मौके पर कुछ समय के लिए हलचल रही और आसपास के लोगों में मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।बताया गया कि नगर पालिका कार्यालय के सामने टंकी के पास स्थित खसरा नंबर 1834 की भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार राजस्व अभिलेखों में उक्त भूमि श्रेणी पांच में दर्ज है और इसे काजी हाउस/कान जोत के रूप में दर्ज बताया जा रहा है। इसी भूमि पर दुकानों समेत अन्य निर्माण कार्य कराए जाने को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।

शिकायत के बाद एमडीए की टीम मौके पर पहुंची और निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने निर्माण से संबंधित दस्तावेजों और स्वीकृत मानचित्र के संबंध में जानकारी जुटाई। निरीक्षण के दौरान स्वीकृत नक्शे से संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर टीम ने निर्माण स्थल को सील कर दिया। कार्रवाई के बाद मौके पर निर्माण कार्य रुक गया।हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन होने का दावा

स्थानीय लोगों का कहना है कि खसरा नंबर 1834 की भूमि को लेकर मालिकाना हक, नोटिस और अन्य वैधानिक बिंदुओं से संबंधित मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। बताया गया कि WRIT-C संख्या 27741/2026 के तहत मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण अथवा व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने से पहले संबंधित विभागों की अनुमति और न्यायालय से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की जांच आवश्यक बताई जा रही है।

पालिका से अनुमति देने से पहले अभिलेख जांचने की मांगएमडीए की सीलिंग कार्रवाई के बाद स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों ने नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी से मांग की है कि खसरा नंबर 1834 की जमीन से संबंधित किसी भी दुकान, निर्माण अथवा व्यावसायिक गतिविधि के लिए अनुमति या एनओसी जारी करने से पहले राजस्व अभिलेखों की पूरी जांच कराई जाए। साथ ही न्यायालय में लंबित मामले की वर्तमान स्थिति का भी विधिवत सत्यापन कराने की मांग की गई है।लोगों का कहना है कि जब भूमि से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है, तो किसी भी प्रकार की अनुमति जारी करते समय सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

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