मंदिर संपत्ति विवाद में वादी ट्रस्ट का प्रार्थना पत्र निरस्त

कांधला। न्यायालय सिविल जज (सीनियर डिवीजन), कैराना के पीठासीन अधिकारी गंधर्व पटेल ने मूल वाद संख्या 58/2019 मंदिर महादेव मारूफ शिवाला कांधला धर्मार्थ ट्रस्ट बनाम विष्णु प्रकाश आदि में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए वादी पक्ष के अस्थायी निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया।

मामले में मंदिर महादेव मारूफ शिवाला कांधला धर्मार्थ ट्रस्ट की प्रबंधक/संरक्षक कुमारी शालिनी कौशिक की ओर से विवादित संपत्ति, खसरा संख्या 789, 790, 791 और 792 पर प्रतिवादीगण के हस्तक्षेप को रोकने के लिए अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई थी।

प्रतिवादी पक्ष की ओर से दाखिल आपत्ति में कहा गया कि वादी द्वारा गठित ट्रस्ट डीड फर्जी है। न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि मंदिर की देखरेख एवं प्रबंधन वर्षों से स्थानीय थोक 22 हवेलियान समिति के कारीगरों एवं पुजारियों द्वारा किया जा रहा है। मंदिर की संपत्ति किसी निजी व्यक्ति अथवा ट्रस्ट की संपत्ति न होकर स्वयं भगवान शिव की मूर्ति में निहित है।

न्यायालय ने भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 की धारा 5 का उल्लेख करते हुए कहा कि वादी की ट्रस्ट डीड में मंदिर की अचल संपत्ति का कोई निहित होना साबित नहीं होता। साथ ही उच्चतम न्यायालय की विधि व्यवस्था का संदर्भ देते हुए न्यायालय ने माना कि मंदिर की संपत्ति उसकी मूर्ति में निहित होती है, न कि किसी सेवक या पुजारी में।

न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामला वादी पक्ष में न बनने तथा सुविधा का संतुलन वादी के पक्ष में नहीं होने के कारण वादी के प्रार्थना पत्र संख्या 6ए और 129ग को पूरी तरह निरस्त कर दिया।

मामले मे दूसरे पक्ष से शालिनी कौशिक ने बताया कि न्यायालय में वाद विचाराधीन है इस पर लगा स्टे आर्डर खारिज हुआ है

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