
रुपये दो तभी मिलेगा डिस्चार्ज! कांधला सीएचसी में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल”
* जांच के नाम पर पहले 1500, फिर डिस्चार्ज के लिए 2500 रुपये की मांग, स्टाफ नर्स के पति पर महिलाओं से बदसलूकी का आरोप
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सादिक सिद्दीक़ी.
कांधला।विकास खंड कांधला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य कर्मियों की कथित संवेदनहीनता, अवैध वसूली और अभद्रता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची एक गरीब गर्भवती महिला के परिजनों से पहले जांच के नाम पर रुपये मांगे गए और बाद में डिस्चार्ज करने के लिए अलग से रकम की मांग कर दी गई। आरोप है कि रुपये न देने पर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स के पति ने महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। मामला मीडिया तक पहुंचने के बाद अस्पताल कर्मियों में हड़कंप मच गया और आरोपी बैकफुट पर नजर आए। पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की लिखित शिकायत अधिकारियों से कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
गांव गढ़ीमियां निवासी आदिल पुत्र हाजी शफीक ने बताया कि वह अपनी गर्भवती पत्नी हसीबा को 23 मई को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांधला लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स दीक्षा ने भर्ती के कुछ समय बाद ही जांच कराने के नाम पर 1500 रुपये की मांग कर दी। परिजनों ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए रुपये देने में असमर्थता जताई, तो कथित रूप से इलाज करने से मना कर दिया गया।
पीड़ित का आरोप है कि उसी दौरान अस्पताल परिसर में स्टाफ नर्स का पति कपिल भी मौजूद था, जो शराब के नशे में था। जब परिवार ने रुपये देने से इनकार किया तो उसने महिलाओं के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। गर्भवती महिला की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने किसी तरह 900 रुपये उधार लेकर दिए, जिसके बाद उपचार शुरू किया गया। बाद में महिला ने एक पुत्री को जन्म दिया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रसव के बाद भी वसूली का खेल बंद नहीं हुआ। रविवार को जब पत्नी और नवजात बच्ची को डिस्चार्ज कराने की बात कही गई तो मौके पर मौजूद स्टाफ नर्स और गंगेरू निवासी आशा कार्यकर्ता पूजा ने 2500 रुपये की मांग कर दी। आरोप है कि परिवार द्वारा कारण पूछने पर बताया गया कि 1500 रुपये स्टाफ नर्स, 500 रुपये आशा कार्यकर्ता और 500 रुपये सफाई कर्मचारी को “इनाम” के रूप में देने होंगे।
परिजनों का कहना है कि रुपये न देने पर स्वास्थ्य कर्मियों ने दोबारा अभद्र व्यवहार शुरू कर दिया और मरीज को डिस्चार्ज करने से भी मना कर दिया। इसी बीच मामला बढ़ने पर मीडियाकर्मी मौके पर पहुंच गए। कैमरे देखकर अस्पताल कर्मियों के सुर बदल गए और बाद में उन्होंने इसे “खुशी से दिया जाने वाला इनाम” बताने की कोशिश की।
पीड़ित आदिल ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भेजे शिकायत पत्र में कहा है कि इस घटना से उसकी पत्नी और पूरे परिवार को मानसिक रूप से गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी स्टाफ नर्स, आशा कार्यकर्ता और अस्पताल में मौजूद बाहरी व्यक्ति के खिलाफ कठोर विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी गरीब परिवार का इस तरह आर्थिक और मानसिक शोषण न हो सके।