
प्रदेश में सख्ती, मौलानान में ढिलाई? उठे बड़े सवाल
सख्ती के बावजूद तालाब पर कब्जा प्रशासन पर सवाल
प्रदेश में योगी सरकार का बुलडोजर मॉडल सुर्खियों में है भू-माफियाओं पर कार्रवाई, अवैध कब्जों पर प्रहार और सख्ती का दमदार दावा
फिर भी कस्बे के मोहल्ला मौलानान स्थित मे तालाब की भूमि पर कब्जा
कांधला कस्बे के मोहल्ला मौलानान स्थित करीब 10.5 बीघा तालाब भूमि को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश स्तर पर अवैध कब्जों और भू-माफियाओं के खिलाफ सख्ती के दावों के बीच इस जमीन पर अतिक्रमण और अवैध प्लॉटिंग के आरोपों ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब की भूमि पर धीरे-धीरे कब्जा किया गया और बाद में इसे टुकड़ों में बांटकर बेचा गया। जो तालाब कभी इलाके की जल जरूरतों को पूरा करता था, वही अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। क्षेत्र में गंदगी और अव्यवस्था भी बढ़ती जा रही है।इस मामले में मुख्य वादी जुनेद अख्तर के अनुसार, वाद संख्या 326/14 के तहत न्यायालय का स्टे आदेश पहले से लागू है। इसके बावजूद मौके पर गतिविधियों के जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से जांच कराते हुए तालाब भूमि को कब्जा मुक्त कराया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
प्रदेश में सरकार द्वारा अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार अभियान चलाने और सख्त कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन दावों का प्रभाव जमीनी स्तर पर भी दिखाई देना चाहिए। लोगों ने अपेक्षा जताई है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और ठोस कदम उठाएंगे।नागरिकों का यह भी कहना है कि यदि तालाब भूमि को संरक्षित कर विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र के लिए एक उपयोगी सार्वजनिक स्थल बन सकता है। कई लोगों ने यहां पार्क निर्माण का सुझाव दिया है, जिससे न केवल अतिक्रमण पर रोक लगेगी, बल्कि आमजन को भी सुविधा मिलेगी।फिलहाल, इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्यवाही का इंतजार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रदेश स्तर पर सख्ती के दावों के बीच मौलानान के इस तालाब को कब तक न्याय मिल पाता है।