अकीदत और रूहानियत के साथ अदा हुई रमज़ान के दूसरे जुमे की नमाज़

 

लोगों ने मुल्क और समाज में अमन-ओ-चैन की दुआएं मांगी। पूरे कस्बे में रमज़ान की रूहानी फिज़ा छाई रही।

 

सादिक सिद्दीक़ी

कांधला। माह-ए-रमज़ान की रहमतों और बरकतों से भरा दूसरा जुम्मा कस्बे में पूरे अकीदत और एहतराम के साथ अदा किया गया। मस्जिदों में नमाज़ियों का हुजूम उमड़ पड़ा। लोगों ने पाक-साफ कपड़े पहनकर, वुज़ू करके और दिलों में इमान की रौशनी लेकर अल्लाह की बारगाह में हाज़िरी दी। मस्जिदों में “अल्लाहु अकबर” और “सुब्हानअल्लाह” की सदाओं से माहौल गूंज उठा।

हर गली और मोहल्ले में रमज़ान का रूहानी रंग बिखरा नजर आया। छोटे बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, सभी के चेहरों पर इमान और सुकून झलक रहा था। नमाज़ से पहले मौलानाओं ने तकरीर पेश की, जिसमें रमज़ान की फ़ज़ीलत, रोज़े की अहमियत और नेक अमल की दावत दी गई। उन्होंने कहा कि रोज़ा सिर्फ भूख-प्यास से रुकना नहीं, बल्कि सब्र, इंसानियत और हमदर्दी की तालीम है। उन्होंने लोगों से अमन, भाईचारा और मोहब्बत कायम रखने की अपील की।

जुमे की नमाज़ अदा करने के बाद नमाज़ियों ने एक-दूसरे से गले मिलकर रमज़ान की मुबारकबाद दी। मस्जिदों के बाहर बच्चों की खिलखिलाहट और बुज़ुर्गों की दुआओं का नूर माहौल को रूहानी बना रहा था। लोगों ने मुल्क और समाज में अमन-ओ-चैन की दुआएं मांगी।

पूरे कस्बे में रमज़ान की रूहानी फिज़ा छाई रही। मस्जिदों से उठती अज़ानें, घरों में इबादत की आवाज़ें और दिलों में दुआएं हर तरफ अल्लाह की याद और शुक्रगुज़ारी का आलम देखने को मिला। रमज़ान के दूसरे जुमे ने कांधला को ईमान, मोहब्बत और रहमत की खुशबू से महका दिया।

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