स्वतंत्रता दिवस पर कांधला में ऑल इंडिया मुशायरा

शायरों के अशआर से गूंजा रोज़ गार्डन, हजारों श्रोताओं ने देर रात तक उठाया लुत्फ़

सादिक सिद्दीकी

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कांधला स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांधला कस्बे का गंगेरू मार्ग स्थित रोज़ गार्डन ऐतिहासिक साहित्यिक महफ़िल का गवाह बना। यहां भव्य ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया, जिसने सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम दिया। देशभर से आए नामचीन शायरों ने अपने अशआर और ग़ज़लों से ऐसी महफ़िल सजाई कि हज़ारों की संख्या में मौजूद श्रोतागण देर रात तीन बजे तक मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे और दाद व तालियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। मुशायरे की अध्यक्षता कैराना नगर पालिका परिषद के चेयरमैन शमशाद अन्सारी ने की। कांधला नगर पालिका परिषद के चेयरमैन नज्मुल इस्लाम ने शमा रोशन किया, जबकि समाजसेवी ग़य्यूर सिद्दीकी ने फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य वीरेन्द्र सिंह, सभासद जुनेद मुखिया और समाजसेवी बाबर जंग बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। डा. माजिद देवबंदी, वारिस वारिसी, सरिता जैन सहित अनेक दिग्गज शायरों ने अपनी नायाब शायरी से समां बाँधा।

शायरों के अशआर से गूंजा रोज़ गार्डन, हजारों श्रोताओं ने देर रात तक उठाया लुत्फ़

डा. माजिद देवबंदी का शेर श्रोताओं के दिलों में उतर गया –

“अल्लाह मेरे रिज़्क़ की बरकत न चली जाए,दो

रोज़ से घर में कोई मेहमान नहीं है।”

आयोजक शायर जुनेद अख़्तर का यह शेर खूब सराहा गया –

“आस्तीनों से कोई सांप तो बाहर आए,

हमने एक नेवला मुट्ठी में छुपा रक्खा है।”

हज़ारों की भीड़ ने हर शेर पर गूंजती तालियों और दाद के साथ शायरों का हौसला बढ़ाया। रात तीन बजे तक चली इस महफ़िल ने स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को साहित्यिक और सांस्कृतिक चमक प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में मुशायरा कन्वीनर रिज़वान अन्सारी और आयोजक जुनेद अख़्तर ने सभी अतिथियों, शायरों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मुशायरा न केवल स्वतंत्रता दिवस का मुख्य आकर्षण साबित हुआ, बल्कि कांधला की सांस्कृतिक पहचान में भी स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया।

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