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कैराना। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों के विलय या एकीकरण के निर्णय के खिलाफ उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने भाजपा एमएलसी चौधरी वीरेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपकर इस नीति को वापस लेने की मांग की है। शिक्षक संघ का कहना है कि यह निर्णय शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2009 और बाल अधिकारों के विरुद्ध है।

मंगलवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष विनय तिवारी और महामंत्री उमाशंकर सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा एमएलसी चौधरी वीरेंद्र सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।

“शिक्षा के अधिकार का हनन”

ज्ञापन में कहा गया कि सरकार द्वारा छात्र संख्या कम होने का हवाला देकर परिषदीय विद्यालयों के विलय का निर्णय लिया गया है, जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम-2009 और बाल अधिकारों के खिलाफ है। शिक्षक संघ के अनुसार, परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की संख्या कम होने के पीछे केवल शिक्षक ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि इसके कई अन्य कारण भी हैं।

“संसाधनहीन बच्चों के लिए मुश्किल होगी शिक्षा”

शिक्षक संघ ने चेतावनी दी कि अगर विद्यालयों का विलय किया गया, तो गरीब और संसाधनहीन परिवारों के बच्चों के लिए निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा। ज्ञापन में इस निर्णय के भविष्य में होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया गया और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की गई।

इस अवसर पर पूर्व विधायक महीपाल माजरा सहित जिला मंत्री गुलाब सिंह, वरुण चौधरी, हारुण चौहान, सुनील चौधरी, महावीर सिंह, संदीप कुमार, सचिन चौहान, हरविंदर, गोविंद, अमित और जगत सिंह समेत कई शिक्षक मौजूद रहे।

शिक्षक संघ ने सरकार से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की सुविधा बनाए रखने की अपील की है।

 

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