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आरोपों का तूफान: अखिलेश यादव ने भाजपा पर लगाए आरोप, कहा- ‘नाकामियों को छिपाने और संविधान तोड़ने की चल रही है साजिश’

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का तीखा हमला- ‘भाजपा सांप्रदायिक एजेंडे से संवैधानिक मूल्यों को पहुंचा रही है नुकसान’

अखिलेश ने कहा- ‘भाजपा की असफलताएं छिपाने का हथकंडा है ‘सांप्रदायिक राजनीति’

 

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र व यूपी में भाजपा सरकार अपनी “नाकामियों को छिपाने” के लिए जानबूझकर सांप्रदायिक रास्ता अपना रही है और संविधान के मूल ढांचे को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। यादव ने सोमवार को X पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू कर दी हैं।

“सत्ता बचाने के लिए भाजपा कर रही है समाज को बांटने का काम”: अखिलेश

अखिलेश यादव ने भावुक अंदाज में कहा कि भाजपा सरकार ने बेरोजगारी, महंगाई और किसान संकट जैसे मुद्दों पर पूरी तरह विफलता हासिल की है। अब वे जनता का ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का खेल खेल रही हैं। यह पार्टी संविधान की मूल भावना को खत्म करके देश को ‘एकाधिकारवादी व्यवस्था’ की ओर धकेलना चाहती है। उन्होंने यूपी सरकार पर आरोप लगाया कि वह “डबल इंजन की असफलता” को छिपाने के लिए धार्मिक विवादों को हवा दे रही है।

संविधान पर संकट का इशारा

सपा नेता ने आगे कहा कि भाजपा का नेतृत्व संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को नष्ट करने पर तुला है। नागरिकता कानून (CAA) से लेकर एकसमान नागरिक संहिता (UCC) और हाल ही में (Waqf Bill) वक़्फ़ अमेंडमेंट बिल तक, हर फैसला समाज को तोड़ने और अल्पसंख्यकों को डराने की रणनीति का हिस्सा है।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे “संविधान बचाओ” के नारे के साथ भाजपा के “तानाशाही रवैये” के खिलाफ आवाज उठाएं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

अखिलेश के इस बयान पर भाजपा ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, वहीं, कांग्रेस और बसपा ने अखिलेश के “संविधान को खतरे में बताने” वाले बयान को “गंभीर चिंता का विषय” बताया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान यूपी में सपा के धर्मनिरपेक्ष गठबंधन “पीडीए” को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। साथ ही, भाजपा के “विकास के मॉडल” पर सवाल उठाकर सपा पारंपरिक वोट बैंक को लामबंद करने की कोशिश कर रही है।

अखिलेश यादव का यह बयान एक बार फिर देश में सांप्रदायिक राजनीति और संवैधानिक मूल्यों पर बहस छेड़ने वाला साबित हो सकता है। जबकि भाजपा इन आरोपों को “निराधार” बता चुकी है, विपक्षी दलों का मानना है कि यह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का सही वक्त है।

 

 

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