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मोमोज फैक्टरी में कुत्ते का सिर मिलने का मामला गूंजा संसद में; स्वाति मालीवाल ने मांगी गंदगी भरे उत्पादन पर कार्रवाई

संसद में उठा पाम ऑयल का मुद्दा: स्वाति मालीवाल ने बताया मिलावटी तेल सेहत के लिए ‘जहर’, कैंसर-मोटापे का बताया कारण

“विदेशों में सनफ्लावर, भारत में पाम ऑयल! फूड कंपनियों पर ‘डबल स्टैंडर्ड’ का आरोप, एनालॉग पनीर पर भी सवाल

 

नई दिल्ली। 28 मार्च। राज्य सभा सांसद स्वाति मालीवाल ने शुक्रवार को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पैकेज्ड फूड उत्पादों में मिलावटी और नकली तेलों के बेरोकटोक इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई। उन्होंने विशेष रूप से पाम ऑयल और सिंथेटिक ऑयल के सेहत पर पड़ने वाले घातक प्रभावों को उजागर करते हुए कहा कि ये तेल मोटापा, डायबिटीज़, कैंसर और शुगर जैसी बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

मालीवाल ने आरोप लगाया कि कई बहुराष्ट्रीय फूड कंपनियां भारत में पाम ऑयल का उपयोग कर रही हैं, जबकि वे विदेशों में स्वास्थ्यवर्धक सनफ्लावर ऑयल का इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा कि यह डबल स्टैंडर्ड की नीति है। भारतीय उपभोक्ताओं के साथ यह खिलवाड़ बंद होना चाहिए।

WHO मानकों का उल्लंघन

सांसद ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि बाजार में बिकने वाले कई पैक्ड फूड उत्पाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए सख्त नियम बनाए जाने चाहिए।

एनालॉग पनीर और गंदगी भरे मोमोज

मालीवाल ने ‘एनालॉग पनीर’ को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बाजार में असली पनीर की तरह दिखने वाला यह नकली उत्पाद बेचा जा रहा है, जो दूध से नहीं बल्कि केमिकल और हानिकारक तत्वों से तैयार किया जाता है। इसके अलावा, उन्होंने मोमोज निर्माण इकाइयों में व्याप्त गंदगी और स्वच्छता के अभाव को भी रेखांकित किया। पंजाब के मोहाली में एक मोमोज फैक्ट्री पर छापे के दौरान कुत्ते का सिर मिलने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी फैक्ट्रियां लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं। इन पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।

सरकार से मांग

मालीवाल ने केंद्र सरकार से मांग की कि खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जाए और मिलावटखोर कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने के लिए पैकेजिंग पर स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य की जाए।

इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है। खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावट रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और भारी जुर्माने का प्रावधान जरूरी है।

 

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