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सहारनपुर नगर निगम के कुत्ता नसबंदी अभियान में लाखों का घोटाला! ठेकेदारों ने बनाई ‘फर्जीवाड़े’ की चेन

सहारनपुर: सहारनपुर नगर निगम द्वारा शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे कुत्ता नसबंदी अभियान में बड़ा घोटाला सामने आया है। ठेकेदार कंपनियों ने अभियान के तहत कुत्तों को एक इलाके से पकड़कर दूसरी जगह छोड़ने का सिलसिलेवार फर्जीवाड़ा रचा और निगम से लाखों रुपये का गैर-कानूनी भुगतान हासिल किया। इससे न केवल सरकारी कोष को भारी नुकसान हुआ है, बल्कि आम नागरिकों को भी सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर नियंत्रण पाने के लिए सहारनपुर नगर निगम ने एक अहम पहल की थी। नगर निगम द्वारा बेहट रोड स्थित एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर का निर्माण कराया गया था, जो 5 दिसंबर 2022 से विधिवत रूप से कार्य करना शुरू कर चुका है। इस केंद्र के माध्यम से शहर भर में फैले आवारा कुत्तों की नसबंदी (स्टेरिलाइज़ेशन) कर उनकी संख्या में वृद्धि को रोका जाना मक़सद था। लेकिन फर्जीवाड़ा के चलते इस मक़सद को पूरा करना मुश्किल लग रहा है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?

जानकारी के मुताबिक, निगम ने शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और लोगों की शिकायतों के बाद नसबंदी अभियान शुरू किया था। इसमें ठेकेदारों को प्रति कुत्ता नसबंदी का पैमाना तय किया गया। हालांकि, कुछ ठेकेदारों ने इस योजना का गलत फायदा उठाते हुए “कैच एंड रिलीज” का अवैध तरीका अपनाया। उन्होंने एक क्षेत्र से कुत्तों को पकड़ा, नसबंदी का झूठा दावा करते हुए उन्हें दूसरे इलाके में छोड़ दिया। इसके बाद उन्हीं कुत्तों को दोबारा पकड़कर नए बिल के साथ निगम से पैसे वसूले। कुछ मामलों में तो कुत्तों को बिना नसबंदी के ही छोड़ दिया गया।

निगम को लाखों का नुकसान, जनता की परेशानी बढ़ी

सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले से नगर निगम को लगभग 50 लाख रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ है। वहीं, आवारा कुत्तों की संख्या में कमी न होने से स्थानीय निवासियों को लगातार समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। मुहल्लों में कुत्तों के झुंड के कारण बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है। साथ ही, कूड़े के ढेरों के आसपास कुत्तों की मौजूदगी से स्वच्छता अभियान भी प्रभावित हो रहा है।

जनता का गुस्सा, मांगे कड़ी कार्रवाई

स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले में निगम प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हमारे इलाके में कुत्तों की संख्या पहले जैसी ही है। करोड़ों रुपये के अभियान का फायदा नहीं दिख रहा। साफ है कि पैसा बीच में ही गायब हो गया। कई लोगों ने ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और निगम अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) या नसबंदी क्या है?

एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) एक वैज्ञानिक तरीका है, जिसमें आवारा कुत्तों की सर्जरी के माध्यम से प्रजनन क्षमता समाप्त की जाती है। इस प्रक्रिया में नर कुत्तों के वृषण और मादा कुत्तों के अंडाशय को हटा दिया जाता है। यह प्रक्रिया पशु चिकित्सकों द्वारा संज्ञाहरण (एनेस्थीसिया) के बाद की जाती है, जिससे कुत्तों को दर्द नहीं होता। नसबंदी के बाद कुत्तों को टीका लगाकर उन्हें उनके मूल स्थान पर छोड़ दिया जाता है।

ABC के फायदे:

जनसंख्या नियंत्रण: नसबंदी से आवारा कुत्तों की संख्या धीरे-धीरे कम होती है।

रेबीज का खतरा घटता है: टीकाकरण से मनुष्यों और जानवरों में रेबीज फैलने का जोखिम कम हो जाता है।

मानव-पशु संघर्ष में कमी: नसबंदी से कुत्तों का आक्रामक व्यवहार घटता है, जिससे इंसानों से झगड़े कम होते हैं।

मानवीय समाधान: यह तरीका कुत्तों को मारने या उन्हें भगाने से कहीं अधिक नैतिक और प्रभावी है।

पारिस्थितिकी संतुलन: आबादी नियंत्रण से कुत्तों के लिए संसाधनों की प्रतिस्पर्धा कम होती है, जिससे उनका जीवन स्तर सुधरता है।

 

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