वक़्फ़ बिल के ख़िलाफ़ दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन: मुस्लिम संगठनों ने कहा – “वक़्फ़ अल्लाह की मिल्कियत, सरकार दखलंदाजी बंद करे”
नई दिल्ली। 8 मार्च। “ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड” और अन्य मुस्लिम मिल्ली संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘वक़्फ़ बिल’ के ख़िलाफ़ 13 मार्च 2025 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार को यह संदेश देना है कि वह मुसलमानों के धार्मिक मामलों, ख़ासकर वक़्फ़ प्रबंधन में हस्तक्षेप न करे।
“वक़्फ़ अल्लाह की संपत्ति, सरकारी हस्तक्षेप नहीं चलेगा”
जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी और महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने इस प्रदर्शन को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि सरकार का वक़्फ़ बिल पर अड़े रहना मुस्लिम समुदाय की धार्मिक पहचान को नष्ट करने की साज़िश है। मौलाना मदनी ने ज़ोर देकर कहा, “वक़्फ़ किसी व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि अल्लाह की मिल्कियत है। इसकी प्रकृति में बदलाव या सरकारी नियंत्रण शरीयत के सिद्धांतों और संविधान प्रदत्त अधिकारों दोनों का उल्लंघन है।”
“संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी नहीं होने देंगे”
मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा, “हम सरकार से मांग करते हैं कि वह मुसलमानों के आंतरिक धार्मिक मामलों में दखल देना बंद करे। वक़्फ़ बिल पर उठाए गए सवालों को गंभीरता से सुना जाए।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने इस मुद्दे पर समुदाय की भावनाओं को नज़रअंदाज़ किया, तो यह देश की धर्मनिरपेक्ष संरचना के लिए ख़तरनाक होगा।
सभी नागरिकों से अपील
जमीअत उलमा-ए-हिंद ने देश के सभी न्यायप्रिय नागरिकों, धार्मिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। संगठन ने कहा कि यह प्रदर्शन न केवल मुसलमानों, बल्कि हर उस नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है, जो संविधान में निहित अल्पसंख्यक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर विश्वास रखता है।
क्या है विवाद?
वक़्फ़ से जुड़े मुद्दे भारतीय मुसलमानों के लिए अत्यंत संवेदनशील हैं। वक़्फ़ संपत्तियों का उपयोग मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और सामाजिक कल्याण के कार्यों के लिए किया जाता है। मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित बिल के ज़रिए सरकार वक़्फ़ बोर्डों के अधिकार कमज़ोर करके इन संपत्तियों पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। उनका कहना है कि यह क़दम समुदाय के धार्मिक स्वायत्तता के अधिकार पर हमला है।
वक़्फ़ क़ानूनों में बदलाव को लेकर मुस्लिम समुदाय और सरकार के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों से बना हुआ है। संगठनों का आरोप है कि सरकार द्वारा बिना चर्चा के इस बिल को लाने का प्रयास समुदाय के साथ विश्वासघात है। अब यह देखना होगा कि दिल्ली में होने वाला यह विरोध प्रदर्शन सरकार के रुख़ में बदलाव ला पाता है या नहीं।