
दादा की मौत दबाई, हर महीने खाते से निकालता रहा ₹65 हजार पेंशन
* मौत के बाद भी “जिंदा” रहा फौजी दादा! कलयुगी पोता 10 महीने तक डकारता रहा ₹65 हजार पेंशन
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सादिक सिद्दीक़ी
कांधला। रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला गांव गढ़ीश्याम से सामने आया है, जहां एक कलयुगी पोते ने पेंशन के लालच में अपने ही मृत फौजी दादा की मौत को करीब 10 महीने तक छुपाए रखा। आरोप है कि दादा की मौत के बाद भी पोता उनके एटीएम और बैंक क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर हर महीने हजारों रुपये निकालता रहा और ऐश करता रहा।
जानकारी के अनुसार सेवानिवृत्त फौजी अजब सिंह पुत्र भूला की बीमारी के चलते 14 फरवरी 2024 को मौत हो गई थी। दुखद बात यह रही कि उसी दिन सदमे में उनके पुत्र वीरेन्द्र सिंह ने भी दम तोड़ दिया। उस समय पूर्व फौजी अजब सिंह को करीब 65 हजार रुपये मासिक पेंशन मिल रही थी।
ग्रामीणों के मुताबिक अजब सिंह का एटीएम कार्ड और बैंक संबंधी पूरा काम उनका पोता सोनू संभालता था। आरोप है कि पिता वीरेन्द्र सिंह की मौत का प्रमाण पत्र तो जल्द बनवा लिया गया, लेकिन दादा अजब सिंह की मौत को पेंशन के लालच में पूरी तरह दबाकर रखा गया।
बताया जा रहा है कि फरवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक लगातार खाते से पेंशन निकाली जाती रही। आरोपी पोता हर महीने रकम निकालकर मौज उड़ाता रहा और विभाग को भनक तक नहीं लगने दी। जब मामला खुला तो गांव में हड़कंप मच गया और लोग दंग रह गए।
ग्रामीणों का कहना है कि पैसों की हवस में पोते ने रिश्तों की मर्यादा तक बेच डाली। अब मामले को लेकर जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
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*मजबूरी में बनवाना पडा मृत्यु प्रमाण पत्र*
रक्षा मंत्रालय के नियमों के मुताबिक, हर साल पेंशनभोगियों को अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होता है। उपरोक्त प्रक्रिया हर साल दिसम्बर माह में शुरू हो जाती है, किन्तु अजब सिंह की मृत्यु हो जाने के कारण उनका आॅनलाइन जब डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा नही किया जा सका तो बैंक ने उनकी पेंशन को बंद कर दिया। जिसके बाद भी उनके पोते सोनू ने बैंक को अपने बाबा की मृत्यु की जानकारी नही दी, तथा उनका जीवन प्रमाण पत्र बैंक में जमा ना होने पर उसने ग्राम पंचायत में 18/12/2024 में अपने बाबा अजब सिंह की मृत्यु की जानकारी देते हुए उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया, किन्तु बैंक में फिर भी उसे जमा नही कराया गया।
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*दूसरे पोते ने खोला राज*
मृतक सूबेदार अजब सिंह के दो पोते सोनू व सुमित है, जानकारी के अनुसार पिछले काफी समय से दोनों भाईयों में पेंशन की धनराशि को लेकर विवाद चल रहा था, किन्तु सोनू ने अपने भाई सुमित को फर्जी तरीके से ली गई पेंशन में से एक भी रूपया नही दिया, जिसके चलते दोनों भाईयों के बीच हुए विवाद के बाद लगभग डेढ साल बाद उपरोक्त मामले का खुलासा हो सका है।
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*शिकायत के बाद कार्यवाही संभव*
मामले के बारे में जब खण्ड विकास अधिकारी वेदप्रकाश द्विवेद्वी से जानकारी की तो उन्होंने मामला उनके संज्ञान में नही है, ना ही किसी के द्वारा शिकायत की गई है। यह बेहद गंभीर मामला है। अगर इस प्रकार का कृत्य किया गया है तो आरोपी ने न सिर्फ सरकारी धन का गबन किया है, बल्कि एक देश सेवा करने वाले बुजुर्ग के साथ भी धोखा किया है। शिकायत मिलने पर जांच के बाद उचित कार्यवाही की जायेगी।
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