ऑपरेशन सवेरा का अधूरा असर छोटी मछलियाँ जाल में, बड़े मगरमच्छ अब भी बेख़ौफ़!

 

 

[ थाना प्रभारी की मुहिम सराहनीय, लेकिन बेखौफ सक्रिय स्मैक बड़े सौदागर बने चुनौती ]

 

रिपोर्ट सादिक सिद्दीक़ी

शामली; कांधला, कस्बे में नशे के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान ऑपरेशन सवेरा ने असर तो दिखाया है, लेकिन यह अभी अधूरा साबित हो रहा है। थाना प्रभारी सतीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने गांजा और सुल्फ़ा बेचने वाले कई छोटे तस्करों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है। लेकिन कस्बे की सबसे बड़ी समस्या – सलेमपुर मार्ग पर सक्रिय कुख्यात स्मैक माफ़ियाओं पर शिकंजा कसना अब तक दूर की बात बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सलेमपुर मार्ग लंबे समय से स्मैक कारोबार का गढ़ बना हुआ है। यहाँ के बड़े तस्कर खुलेआम कारोबार कर रहे हैं और पुलिस की पकड़ अब तक उन तक नहीं पहुँच पाई है। कार्रवाई सिर्फ छोटे सौदागरों तक ही सीमित दिख रही है। “छोटी मछलियाँ पकड़ने से कस्बा नशा मुक्त नहीं होगा।”जब तक बड़े मगरमच्छ जेल नहीं भेजे जाते, तब तक यह लड़ाई अधूरी रहेगी।” समाजसेवियों ने थाना प्रभारी की मुहिम को सराहनीय बताया, लेकिन साथ ही चेताया की “गांजा-सुल्फ़ा पकड़ना आसान है, असली जीत तभी होगी जब स्मैक तस्करों पर शिकंजा कसा जाए।” कब तक सलेमपुर मार्ग पर सक्रिय स्मैक तस्कर कानून से बाहर रहेंगे क्या पुलिस बड़े मगरमच्छों तक पहुँच पाएगी?और कब होगा कांधला पूरी तरह नशा मुक्त?कस्बे के लोगों की नज़रें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। ऑपरेशन सवेरा की असली सफलता तभी मानी जाएगी जब सलेमपुर मार्ग के बड़े तस्कर सलाखों के पीछे होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!